Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
24 Jul 2016 · 1 min read

तुम…. तब और अब (हास्य-कविता)

तुम…. तब और अब
****************************************

तब तुम अल्हड़ शोख कली थी,
अब पूरी फुलवारी हो,
तब तुम पलकों पर रहती थी,
अब तुम मुझ पर भारी हो ।

तब तुम चंचल तितली सी थी,
अब तुम एक कटारी हो,
तब थे नैनोनक्श कँटीले,
अब तुम पूरी आरी हो ।

तब तुम चंदा सी लगती थी,
अब पूरी चिंगारी हो,
तब तुम खास थी इस दुनियाँ में,
अब तुम दुनियाँदारी हो ।

तब तुम आइ लव यू कहती थी,
अब तुम देती गारी हो,
तब तुम मेरा क्रेडिट सी थी,
अब तुम मेरी उधारी हो ।

तब तुम नयी नवेली थी,
अब बच्चों की महतारी हो,
तब तुम होगी किसी और की,
अब तुम प्रिये हमारी हो ।

****************************************
**हरीश*लोहुमी**
****************************************

Language: Hindi
2 Comments · 913 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
खाने पीने का ध्यान नहीं _ फिर भी कहते बीमार हुए।
खाने पीने का ध्यान नहीं _ फिर भी कहते बीमार हुए।
Rajesh vyas
"𝗜 𝗵𝗮𝘃𝗲 𝗻𝗼 𝘁𝗶𝗺𝗲 𝗳𝗼𝗿 𝗹𝗼𝘃𝗲."
पूर्वार्थ
#दोहा-
#दोहा-
*Author प्रणय प्रभात*
कठिन परीक्षा
कठिन परीक्षा
surenderpal vaidya
सत्य की खोज........एक संन्यासी
सत्य की खोज........एक संन्यासी
Neeraj Agarwal
💐अज्ञात के प्रति-63💐
💐अज्ञात के प्रति-63💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी
हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी
Mukesh Kumar Sonkar
"यादें अलवर की"
Dr Meenu Poonia
कुछ एक आशू, कुछ एक आखों में होगा,
कुछ एक आशू, कुछ एक आखों में होगा,
goutam shaw
Jaruri to nhi , jo riste dil me ho ,
Jaruri to nhi , jo riste dil me ho ,
Sakshi Tripathi
Yesterday ? Night
Yesterday ? Night
Otteri Selvakumar
2711.*पूर्णिका*
2711.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
ग़रीबों को फ़क़त उपदेश की घुट्टी पिलाते हो
ग़रीबों को फ़क़त उपदेश की घुट्टी पिलाते हो
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
हो रहा अवध में इंतजार हे रघुनंदन कब आओगे।
हो रहा अवध में इंतजार हे रघुनंदन कब आओगे।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
आज़ादी की जंग में कूदी नारीशक्ति
आज़ादी की जंग में कूदी नारीशक्ति
कवि रमेशराज
दिल का खेल
दिल का खेल
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
इस क्षितिज से उस क्षितिज तक देखने का शौक था,
इस क्षितिज से उस क्षितिज तक देखने का शौक था,
Smriti Singh
ईश्वर से साक्षात्कार कराता है संगीत
ईश्वर से साक्षात्कार कराता है संगीत
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
शोकहर छंद विधान (शुभांगी)
शोकहर छंद विधान (शुभांगी)
Subhash Singhai
जनता को तोडती नही है
जनता को तोडती नही है
Dr. Mulla Adam Ali
देश के राजनीतिज्ञ
देश के राजनीतिज्ञ
विजय कुमार अग्रवाल
तू ही मेरी चॉकलेट, तू प्यार मेरा विश्वास। तुमसे ही जज्बात का हर रिश्तो का एहसास। तुझसे है हर आरजू तुझ से सारी आस।। सगीर मेरी वो धरती है मैं उसका एहसास।
तू ही मेरी चॉकलेट, तू प्यार मेरा विश्वास। तुमसे ही जज्बात का हर रिश्तो का एहसास। तुझसे है हर आरजू तुझ से सारी आस।। सगीर मेरी वो धरती है मैं उसका एहसास।
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
चाय
चाय
Rajeev Dutta
"भावनाएँ"
Dr. Kishan tandon kranti
माॅ प्रकृति
माॅ प्रकृति
Jeewan Singh 'जीवनसवारो'
हसरतें हर रोज मरती रहीं,अपने ही गाँव में ,
हसरतें हर रोज मरती रहीं,अपने ही गाँव में ,
Pakhi Jain
विभीषण का दुःख
विभीषण का दुःख
Dr MusafiR BaithA
*जिस सभा में जाति पलती, उस सभा को छोड़ दो (मुक्तक)*
*जिस सभा में जाति पलती, उस सभा को छोड़ दो (मुक्तक)*
Ravi Prakash
कवि की कल्पना
कवि की कल्पना
Rekha Drolia
हमने किस्मत से आंखें लड़ाई मगर
हमने किस्मत से आंखें लड़ाई मगर
VINOD CHAUHAN
Loading...