Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings

तुम…. तब और अब (हास्य-कविता)

तुम…. तब और अब
****************************************

तब तुम अल्हड़ शोख कली थी,
अब पूरी फुलवारी हो,
तब तुम पलकों पर रहती थी,
अब तुम मुझ पर भारी हो ।

तब तुम चंचल तितली सी थी,
अब तुम एक कटारी हो,
तब थे नैनोनक्श कँटीले,
अब तुम पूरी आरी हो ।

तब तुम चंदा सी लगती थी,
अब पूरी चिंगारी हो,
तब तुम खास थी इस दुनियाँ में,
अब तुम दुनियाँदारी हो ।

तब तुम आइ लव यू कहती थी,
अब तुम देती गारी हो,
तब तुम मेरा क्रेडिट सी थी,
अब तुम मेरी उधारी हो ।

तब तुम नयी नवेली थी,
अब बच्चों की महतारी हो,
तब तुम होगी किसी और की,
अब तुम प्रिये हमारी हो ।

****************************************
**हरीश*लोहुमी**
****************************************

2 Comments · 575 Views
You may also like:
कौन दिल का
Dr fauzia Naseem shad
ग़ज़ल /
ईश्वर दयाल गोस्वामी
अनामिका के विचार
Anamika Singh
पिता
Meenakshi Nagar
हम तुमसे जब मिल नहीं पाते
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
काश....! तू मौन ही रहता....
Dr. Pratibha Mahi
पिता की व्यथा
मनोज कर्ण
"बेटी के लिए उसके पिता "
rubichetanshukla रुबी चेतन शुक्ला
रावण का प्रश्न
Anamika Singh
पिता
Pt. Brajesh Kumar Nayak
क्या ज़रूरत थी
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
रुक-रुक बरस रहे मतवारे / (सावन गीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
ये दिल मेरा था, अब उनका हो गया
Ram Krishan Rastogi
विचार
साहित्य लेखन- एहसास और जज़्बात
नफरत की राजनीति...
मनोज कर्ण
पिता
लक्ष्मी सिंह
पिता की छांव
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
लकड़ी में लड़की / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
उलझनें_जिन्दगी की
मनोज कर्ण
प्यार
Anamika Singh
पितु संग बचपन
मनोज कर्ण
बेटी को जन्मदिन की बधाई
लक्ष्मी सिंह
"मेरे पिता"
vikkychandel90 विक्की चंदेल (साहिब)
जैवविविधता नहीं मिटाओ, बन्धु अब तो होश में आओ
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
पितृ वंदना
संजीव शुक्ल 'सचिन'
कर्ज भरना पिता का न आसान है
आकाश महेशपुरी
जो आया है इस जग में वह जाएगा।
Anamika Singh
तीन किताबें
Buddha Prakash
जीवन के उस पार मिलेंगे
Shivkumar Bilagrami
श्री राम स्तुति
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
Loading...