Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
6 Nov 2016 · 1 min read

तुम्हारा पहला.. कभी पैग़ाम ही आये…….

ग़ज़ल
==========================
किस्सा ओ कहानी ; मिरा क़लाम ही जाये
तस्वीरें बनें ;वो मुक़म्मल शाम ही आये

दीवाली मुबारक ; तुम्हें हम सब देते हैं
तुम्हारा पहला.. कभी पैग़ाम ही आये

तन्हा ‘ शब ‘ रवानी ‘ जुदाई ‘तड़पन’ रोना
क्या ही गज़ब हो .साथ अगर तमाम ही आये

वक़्त फिर से बदल जाये वादे फिर करे हमतुम
दुल्हन तुम ; दूल्हा मैं बनूँ ; आराम ही आये

इन्सां का वज़ूद ”बंटी ‘ अब उलट कर देखे
फलक ज़मीं सभी ज़गह अल्लाह राम ही आये

===============================
bunty singh

377 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
शादी की उम्र नहीं यह इनकी
शादी की उम्र नहीं यह इनकी
gurudeenverma198
Savarnon ke liye Ambedkar bhasmasur.
Savarnon ke liye Ambedkar bhasmasur.
Dr.sima
"Let us harness the power of unity, innovation, and compassi
Rahul Singh
मेनाद
मेनाद
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
अनेकों ज़ख्म ऐसे हैं कुछ अपने भी पराये भी ।
अनेकों ज़ख्म ऐसे हैं कुछ अपने भी पराये भी ।
DR ARUN KUMAR SHASTRI
वक्त नहीं है
वक्त नहीं है
VINOD CHAUHAN
जुल्मतों के दौर में
जुल्मतों के दौर में
Shekhar Chandra Mitra
किस गुस्ताखी की जमाना सजा देता है..
किस गुस्ताखी की जमाना सजा देता है..
कवि दीपक बवेजा
■ आज का क़तआ (मुक्तक)
■ आज का क़तआ (मुक्तक)
*Author प्रणय प्रभात*
सेवा
सेवा
ओंकार मिश्र
भूत अउर सोखा
भूत अउर सोखा
आकाश महेशपुरी
पीर पराई
पीर पराई
Satish Srijan
"प्यार की कहानी "
Pushpraj Anant
एक वो है मासूमियत देख उलझा रही हैं खुद को…
एक वो है मासूमियत देख उलझा रही हैं खुद को…
Anand Kumar
पग-पग पर हैं वर्जनाएँ....
पग-पग पर हैं वर्जनाएँ....
डॉ.सीमा अग्रवाल
श्री रामचरितमानस में कुछ स्थानों पर घटना एकदम से घटित हो जाती है ऐसे ही एक स्थान पर मैंने यह
श्री रामचरितमानस में कुछ स्थानों पर घटना एकदम से घटित हो जाती है ऐसे ही एक स्थान पर मैंने यह "reading between the lines" लिखा है
SHAILESH MOHAN
उसे देख खिल गयीं थीं कलियांँ
उसे देख खिल गयीं थीं कलियांँ
डॉ. श्री रमण 'श्रीपद्'
मजबूरी नहीं जरूरी
मजबूरी नहीं जरूरी
Dr. Pradeep Kumar Sharma
*लाल सरहद* ( 13 of 25 )
*लाल सरहद* ( 13 of 25 )
Kshma Urmila
Magical world ☆☆☆
Magical world ☆☆☆
ASHISH KUMAR SINGH
सितारे अपने आजकल गर्दिश में चल रहे है
सितारे अपने आजकल गर्दिश में चल रहे है
shabina. Naaz
चांद पर पहुंचे बधाई, ये बताओ तो।
चांद पर पहुंचे बधाई, ये बताओ तो।
सत्य कुमार प्रेमी
मैं अचानक चुप हो जाती हूँ
मैं अचानक चुप हो जाती हूँ
ruby kumari
" खुशी में डूब जाते हैं "
भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "
साँसें कागज की नाँव पर,
साँसें कागज की नाँव पर,
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
बारिश की संध्या
बारिश की संध्या
महेश चन्द्र त्रिपाठी
*कांच से अल्फाज़* पर समीक्षा *श्रीधर* जी द्वारा समीक्षा
*कांच से अल्फाज़* पर समीक्षा *श्रीधर* जी द्वारा समीक्षा
Surinder blackpen
*चिपकाते पोस्टर दिखे, दल-प्रत्याशी-लोग (कुंडलिया)*
*चिपकाते पोस्टर दिखे, दल-प्रत्याशी-लोग (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
-- दिव्यांग --
-- दिव्यांग --
गायक - लेखक अजीत कुमार तलवार
23/157.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/157.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
Loading...