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4 Feb 2017 · 1 min read

तुमको दिल में सजा के रख लूँगा

बिजली की चमक देखी है
तेरे इन नैनों में मैने उस दिन
जब में अपने शब्दों को तलाश
रहा था लिखने को अंधेरो में !!

हकीकत बन कर तुम आ गई
सामने मेरे उस दिन
जिस दिन अपनी उलझनों
को संवार रहा था अंधेरे में !!

सुलझा दिया तुमने मेरा
बिगड़ता हुआ वो कल का सपना
यह जान कर खुश हुआ दिल
चलो यह सपना तो है अपना !!

ख्वाब तो रोजाना मैं देखा करता हूँ
कोई तो हो जो जाने मुझे को अपना
यह चन्द लम्हें साथ गुजार लूं
ताकि कोई तो कहने वाला हो अपना !!

यादो कि बारात संजो कर रख लूँगा
तेरे ख्वाबो को मैं अपना बना के रख लूँगा
दुनिया का क्या है वो तो कहती रहेगी
तेरी हर बात को दिल में सजा के रख लूँगा !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

Language: Hindi
228 Views
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