Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
12 Jun 2016 · 1 min read

तुझे इतना बताना चाहता हूँ ! ब्यथा दिल की सुनाना…

तुझे इतना बताना चाहता हूँ !
ब्यथा दिल की सुनाना चाहता हूँ !!

तेरी चाहत मुझे है मुद्दतों से ,
तेरे नजदीक आना चाहता हूँ !!

मेरी किस्मत में हो ऐसा भी शायद ,
तुझे दिल से लगाना चाहता हूँ !!

रो रो कर न बीते ये जवानी ,
खुशी के पल विताना चाहता हूँ !!

रूठ कर देख लो हमसे ऐ जानम ,

तुम्हें फिर से मानना चाहता हूँ !!

सनम तुझसे बयाँ करके मुहब्बत ,
स्वयं को आजमाना चाहता हूँ !!

मेरा है नाम जुगनू इसलिए मैं
प्रभा के गीत गाना चाहता हूँ !!

09200573071 8871887126

1 Comment · 349 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
आखिर कब तक?
आखिर कब तक?
Pratibha Pandey
आदमी और मच्छर
आदमी और मच्छर
Kanchan Khanna
कभी कभी मौन रहने के लिए भी कम संघर्ष नहीं करना पड़ता है।
कभी कभी मौन रहने के लिए भी कम संघर्ष नहीं करना पड़ता है।
Paras Nath Jha
अपनी स्टाईल में वो,
अपनी स्टाईल में वो,
Dr. Man Mohan Krishna
जब सांझ ढले तुम आती हो
जब सांझ ढले तुम आती हो
Dilip Kumar
प्रकृति की गोद खेल रहे हैं प्राणी
प्रकृति की गोद खेल रहे हैं प्राणी
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
*छह माह (बाल कविता)*
*छह माह (बाल कविता)*
Ravi Prakash
जुदाई का एहसास
जुदाई का एहसास
प्रदीप कुमार गुप्ता
*धन्यवाद*
*धन्यवाद*
Shashi kala vyas
क्या बात है फौजी
क्या बात है फौजी
Satish Srijan
नज़रें बयां करती हैं, लेकिन इज़हार नहीं करतीं,
नज़रें बयां करती हैं, लेकिन इज़हार नहीं करतीं,
Keshav kishor Kumar
ख़ामोश सा शहर
ख़ामोश सा शहर
हिमांशु Kulshrestha
सफाई इस तरह कुछ मुझसे दिए जा रहे हो।
सफाई इस तरह कुछ मुझसे दिए जा रहे हो।
Manoj Mahato
2783. *पूर्णिका*
2783. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
बीन अधीन फणीश।
बीन अधीन फणीश।
Neelam Sharma
'मौन अभिव्यक्ति'
'मौन अभिव्यक्ति'
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
प्रायश्चित
प्रायश्चित
Shyam Sundar Subramanian
ज़िंदा हो ,ज़िंदगी का कुछ तो सबूत दो।
ज़िंदा हो ,ज़िंदगी का कुछ तो सबूत दो।
Khem Kiran Saini
मुस्तक़िल बेमिसाल हुआ करती हैं।
मुस्तक़िल बेमिसाल हुआ करती हैं।
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
इक परी हो तुम बड़ी प्यारी हो
इक परी हो तुम बड़ी प्यारी हो
Piyush Prashant
😊लघु-कथा :--
😊लघु-कथा :--
*Author प्रणय प्रभात*
समर्पित बनें, शरणार्थी नहीं।
समर्पित बनें, शरणार्थी नहीं।
Sanjay ' शून्य'
एक समय वो था
एक समय वो था
Dr.Rashmi Mishra
नशीली आंखें
नशीली आंखें
Shekhar Chandra Mitra
कहाँ छूते है कभी आसमाँ को अपने हाथ
कहाँ छूते है कभी आसमाँ को अपने हाथ
'अशांत' शेखर
हमने भी मौहब्बत में इन्तेक़ाम देखें हैं ।
हमने भी मौहब्बत में इन्तेक़ाम देखें हैं ।
Phool gufran
भाव में,भाषा में थोड़ा सा चयन कर लें
भाव में,भाषा में थोड़ा सा चयन कर लें
Shweta Soni
गंदे-मैले वस्त्र से, मानव करता शर्म
गंदे-मैले वस्त्र से, मानव करता शर्म
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
गुलाब
गुलाब
Satyaveer vaishnav
सीख ना पाए पढ़के उन्हें हम
सीख ना पाए पढ़के उन्हें हम
The_dk_poetry
Loading...