Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
8 Jul 2016 · 1 min read

तुकबन्दी को यार छंद, ग़ज़ल कहता हूँ

बात कड़वी है मगर साफ़ सरल कहता हूँ !
तुकबन्दी को यार छंद, ग़ज़ल कहता हूँ !!

जब वो आते है मुस्कुराते हुये घर की तरफ़,
मै अपने झोपड़ी को ताजमहल कहता हूँ !!

काम आयेगी नहीं स्वर्ग की परियाँ मेरे,
जीवन संगिनी को चाँद, कमल कहता हूँ !!

मोटी हो जायेगी सच खाके तू पिज्जा बर्गर,
चाँद को छत पे सुबह शाम टहल कहता हूँ !!

अमर होना नहीं है जुगनू को अमृत पीकर,
जानता हूँ मगर अमृत को गरल कहता हूँ !

186 Views
You may also like:
भूल जाओ इस चमन में...
मनोज कर्ण
12
Dr Archana Gupta
किसी ने कहा, पीड़ा को स्पर्श करना बंद कर पीड़ा...
Manisha Manjari
✍️✍️गुमराह✍️✍️
'अशांत' शेखर
बिछड़न [भाग २]
Anamika Singh
क्या सोचता हूँ मैं भी
gurudeenverma198
हक़ीक़त
Shyam Sundar Subramanian
दुर्गा पूजा विषर्जन
Rupesh Thakur
उदास
Swami Ganganiya
He is " Lord " of every things
Ram Ishwar Bharati
बोलती तस्वीर
राकेश कुमार राठौर
व्यथा
Saraswati Bajpai
तन्मय
Vishnu Prasad 'panchotiya'
अंधेरे के सौदागर
Shekhar Chandra Mitra
तामीर फिर भी करेंगे
Dr fauzia Naseem shad
मन का मोह
AMRESH KUMAR VERMA
मानपत्र
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
सुनो ना
shabina. Naaz
वक्त की उलझनें
ज्ञानीचोर ज्ञानीचोर
“ कॉल ड्यूटी ”
DrLakshman Jha Parimal
कृष्ण नामी दोहे
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
बदनाम दिल बेचारा है
Taj Mohammad
*दशहरे पर मछली देखने की परंपरा*
Ravi Prakash
अंधेरा मिटाना होगा
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
छोड़ दी हमने वह आदते
Gouri tiwari
चंदा मामा
Dr. Kishan Karigar
कुछ तो बोल
Harshvardhan "आवारा"
*"पिता"*
Shashi kala vyas
जय-जय भारत!
अनिल मिश्र
पुस्तक समीक्षा- बुंदेलखंड के आधुनिक युग
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
Loading...