Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
21 Aug 2016 · 1 min read

तिरी नाज़-बरदारी कैसे करूँ मैं

दीवाना है तेरा जो प्यासा बहुत है
कि फरहाद जंगल में भटका बहुत है

वो दिलबर है मेरी कि अय्यार जानो
कि आँखों का उसकी इशारा बहुत है

तिरी शख्सियत पे मैं बलिहारी जाऊं
तिरे साथ जीने की आशा बहुत है

तिरी नाज़-बरदारी कैसे करूँ मैं
अदब कम हुनर कम तमाशा बहुत है

वो कर देगा चुटकी में ही काम सारे
वो नाज़ुक बदन पर कुशादा बहुत है

521 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
“जगत जननी: नारी”
“जगत जननी: नारी”
Swara Kumari arya
शायरी 2
शायरी 2
SURYA PRAKASH SHARMA
स्वरचित कविता..✍️
स्वरचित कविता..✍️
Shubham Pandey (S P)
मां शारदा की वंदना
मां शारदा की वंदना
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
बड़ा हिज्र -हिज्र करता है तू ,
बड़ा हिज्र -हिज्र करता है तू ,
Rohit yadav
हर क़दम पर सराब है सचमुच
हर क़दम पर सराब है सचमुच
Sarfaraz Ahmed Aasee
आऊँगा कैसे मैं द्वार तुम्हारे
आऊँगा कैसे मैं द्वार तुम्हारे
gurudeenverma198
3028.*पूर्णिका*
3028.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
अहसास
अहसास
Sangeeta Beniwal
फोन नंबर
फोन नंबर
पूर्वार्थ
"कहाँ छुपोगे?"
Dr. Kishan tandon kranti
तेरा यूं मुकर जाना
तेरा यूं मुकर जाना
AJAY AMITABH SUMAN
दोहा - चरित्र
दोहा - चरित्र
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
रंग जीवन के
रंग जीवन के
kumar Deepak "Mani"
..
..
*प्रणय प्रभात*
"लेखक होने के लिए हरामी होना जरूरी शर्त है।"
Dr MusafiR BaithA
अपने आँसू
अपने आँसू
डॉ०छोटेलाल सिंह 'मनमीत'
कलम का क्रंदन
कलम का क्रंदन
नवीन जोशी 'नवल'
*धन्य करें इस जीवन को हम, चलें अयोध्या धाम (गीत)*
*धन्य करें इस जीवन को हम, चलें अयोध्या धाम (गीत)*
Ravi Prakash
इस प्रथ्वी पर जितना अधिकार मनुष्य का है
इस प्रथ्वी पर जितना अधिकार मनुष्य का है
Sonam Puneet Dubey
Shabdo ko adhro par rakh ke dekh
Shabdo ko adhro par rakh ke dekh
Sakshi Tripathi
ग़ज़ल(नाम जब से तुम्हारा बरण कर लिया)
ग़ज़ल(नाम जब से तुम्हारा बरण कर लिया)
डॉक्टर रागिनी
संवादरहित मित्रों से जुड़ना मुझे भाता नहीं,
संवादरहित मित्रों से जुड़ना मुझे भाता नहीं,
DrLakshman Jha Parimal
लड़की किसी को काबिल बना गई तो किसी को कालिख लगा गई।
लड़की किसी को काबिल बना गई तो किसी को कालिख लगा गई।
Rj Anand Prajapati
Education
Education
Mangilal 713
"शाम-सवेरे मंदिर जाना, दीप जला शीश झुकाना।
आर.एस. 'प्रीतम'
सुबह, दोपहर, शाम,
सुबह, दोपहर, शाम,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
बाल कविता: तोता
बाल कविता: तोता
Rajesh Kumar Arjun
कविता -
कविता - "सर्दी की रातें"
Anand Sharma
😟 काश ! इन पंक्तियों में आवाज़ होती 😟
😟 काश ! इन पंक्तियों में आवाज़ होती 😟
Shivkumar barman
Loading...