Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
27 Apr 2019 · 1 min read

तितली

तितली रानी आ गयी, लेकर रंग हजार।
फूल फूल पर डोलती, करती उससे प्यार।।
-लक्ष्मी सिंह

Language: Hindi
1 Like · 342 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from लक्ष्मी सिंह
View all
You may also like:
परख: जिस चेहरे पर मुस्कान है, सच्चा वही इंसान है!
परख: जिस चेहरे पर मुस्कान है, सच्चा वही इंसान है!
Rohit Gupta
आज नए रंगों से तूने घर अपना सजाया है।
आज नए रंगों से तूने घर अपना सजाया है।
Manisha Manjari
गुफ्तगू
गुफ्तगू
Naushaba Suriya
माथे पर दुपट्टा लबों पे मुस्कान रखती है
माथे पर दुपट्टा लबों पे मुस्कान रखती है
Keshav kishor Kumar
Lately, what weighs more to me is being understood. To be se
Lately, what weighs more to me is being understood. To be se
पूर्वार्थ
नारी भाव
नारी भाव
Dr. Vaishali Verma
छोटे दिल वाली दुनिया
छोटे दिल वाली दुनिया
ओनिका सेतिया 'अनु '
*ज़िंदगी का सफर*
*ज़िंदगी का सफर*
sudhir kumar
मुझे उस पार उतर जाने की जल्दी ही कुछ ऐसी थी
मुझे उस पार उतर जाने की जल्दी ही कुछ ऐसी थी
शेखर सिंह
पहले दिन स्कूल (बाल कविता)
पहले दिन स्कूल (बाल कविता)
Ravi Prakash
बेचारे नेता
बेचारे नेता
गुमनाम 'बाबा'
जीवन एक मैराथन है ।
जीवन एक मैराथन है ।
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
एक मुट्ठी राख
एक मुट्ठी राख
Shekhar Chandra Mitra
"" *सिमरन* ""
सुनीलानंद महंत
* संस्कार *
* संस्कार *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
ग़ज़ल(उनकी नज़रों से ख़ुद को बचाना पड़ा)
ग़ज़ल(उनकी नज़रों से ख़ुद को बचाना पड़ा)
डॉक्टर रागिनी
कई आबादियों में से कोई आबाद होता है।
कई आबादियों में से कोई आबाद होता है।
Sanjay ' शून्य'
यथार्थ
यथार्थ
Shyam Sundar Subramanian
23/29.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/29.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
मन में क्यों भरा रहे घमंड
मन में क्यों भरा रहे घमंड
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
#मेरे_दोहे
#मेरे_दोहे
*प्रणय प्रभात*
जब जब तुम्हे भुलाया
जब जब तुम्हे भुलाया
Bodhisatva kastooriya
बच्चें और गर्मी के मज़े
बच्चें और गर्मी के मज़े
कुमार
अपार ज्ञान का समंदर है
अपार ज्ञान का समंदर है "शंकर"
Praveen Sain
कविता के मीत प्रवासी- से
कविता के मीत प्रवासी- से
प्रो०लक्ष्मीकांत शर्मा
पूरे शहर का सबसे समझदार इंसान नादान बन जाता है,
पूरे शहर का सबसे समझदार इंसान नादान बन जाता है,
Rajesh Kumar Arjun
बद मिजाज और बद दिमाग इंसान
बद मिजाज और बद दिमाग इंसान
shabina. Naaz
"जीवन का आनन्द"
Dr. Kishan tandon kranti
धर्म या धन्धा ?
धर्म या धन्धा ?
SURYA PRAKASH SHARMA
जीवन में जब संस्कारों का हो जाता है अंत
जीवन में जब संस्कारों का हो जाता है अंत
प्रेमदास वसु सुरेखा
Loading...