Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
6 Aug 2016 · 1 min read

“तरबतर”

लबालब भरे ये श्याम घन
चले आये हैं डग बढ़ाये
धरा लहलहाती , खिलखिलाती
है उनके आतिथ्य में सर झुकाये

काले -काले मेघों के ये घेरे हैं ख़ूब घेरे
ज़रा सा हाथ बढ़ाया और बरस पड़े
पावन सी प्रकृति खिल -खिल गयी
रेशमी बूंदों से पहन ताज़गी का पैरहन

ठहर -ठहर गुज़रती हवा आईने से जल पर
करती चली बेतकल्लुफ चित्रकारियां
बारिशों ने भिगोई है जो शाम ओ सहर
तरबतर हो गया है दिल का शहर

Language: Hindi
2 Likes · 2 Comments · 457 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
बेटियों ने
बेटियों ने
ruby kumari
शर्म शर्म आती है मुझे ,
शर्म शर्म आती है मुझे ,
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
*श्री सुंदरलाल जी ( लघु महाकाव्य)*
*श्री सुंदरलाल जी ( लघु महाकाव्य)*
Ravi Prakash
नयन कुंज में स्वप्न का,
नयन कुंज में स्वप्न का,
sushil sarna
रक्षक या भक्षक
रक्षक या भक्षक
निरंजन कुमार तिलक 'अंकुर'
बदलते दौर में......
बदलते दौर में......
Dr. Akhilesh Baghel "Akhil"
स्वाभिमान
स्वाभिमान
अखिलेश 'अखिल'
व्यथा
व्यथा
Kavita Chouhan
एक शेर
एक शेर
डॉक्टर वासिफ़ काज़ी
किसी से बाते करना छोड़ देना यानि की त्याग देना, उसे ब्लॉक कर
किसी से बाते करना छोड़ देना यानि की त्याग देना, उसे ब्लॉक कर
Rj Anand Prajapati
अगर फैसला मैं यह कर लूं
अगर फैसला मैं यह कर लूं
gurudeenverma198
मैं इश्क़ की बातें ना भी करूं फ़िर भी वो इश्क़ ही समझती है
मैं इश्क़ की बातें ना भी करूं फ़िर भी वो इश्क़ ही समझती है
Nilesh Premyogi
मजदूर हैं हम मजबूर नहीं
मजदूर हैं हम मजबूर नहीं
नेताम आर सी
हाइकु
हाइकु
अशोक कुमार ढोरिया
दो खग उड़े गगन में , प्रेम करते होंगे क्या ?
दो खग उड़े गगन में , प्रेम करते होंगे क्या ?
The_dk_poetry
निराशा हाथ जब आए, गुरू बन आस आ जाए।
निराशा हाथ जब आए, गुरू बन आस आ जाए।
डॉ.सीमा अग्रवाल
"हाथों की लकीरें"
Ekta chitrangini
# महुआ के फूल ......
# महुआ के फूल ......
Chinta netam " मन "
लोकतंत्र में शक्ति
लोकतंत्र में शक्ति
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
थोड़ा पैसा कमाने के लिए दूर क्या निकले पास वाले दूर हो गये l
थोड़ा पैसा कमाने के लिए दूर क्या निकले पास वाले दूर हो गये l
Ranjeet kumar patre
आज की तारीख़ में
आज की तारीख़ में
*Author प्रणय प्रभात*
दोहे ( किसान के )
दोहे ( किसान के )
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
रिसाइकल्ड रिश्ता - नया लेबल
रिसाइकल्ड रिश्ता - नया लेबल
Atul "Krishn"
नारी का अस्तित्व
नारी का अस्तित्व
रेखा कापसे
कैसी पूजा फिर कैसी इबादत आपकी
कैसी पूजा फिर कैसी इबादत आपकी
Dr fauzia Naseem shad
ग़ज़ल
ग़ज़ल
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
विश्व कप लाना फिर एक बार, अग्रिम तुम्हें बधाई है
विश्व कप लाना फिर एक बार, अग्रिम तुम्हें बधाई है
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
मेरी अम्मा तेरी मॉम
मेरी अम्मा तेरी मॉम
Satish Srijan
विश्वास
विश्वास
विजय कुमार अग्रवाल
आखिर मैंने भी कवि बनने की ठानी MUSAFIR BAITHA
आखिर मैंने भी कवि बनने की ठानी MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
Loading...