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31 May 2022 · 1 min read

ट्रेजरी का पैसा

पैसे आये होंगे बहुत
पर ट्रेजरी का आना आना है
इन पैसों की शानी नही
अब तो बंदा मनमाना हैं

संघर्ष के काले बादल का
सावन का पानी आना हैं
उन कमरो को याद करो
जिसका साधा ये निशाना हैं

आते आकर बातें करते
कि मुँह की ना खाना हैं
धैर्य धरे आप ना खोये
मेवा तो पाना ही पाना हैं

मूर्खो को पैसे से तौला
साधक का ताना बाना है
हर बार जीत हम मीत की
सुखका अब नहीं ठीकाना है

जौहर में तो आगे है ही
किसको अब क्या बताना हैं
पढ़ के पाया है ख्वाबो को
बस माता को गले लगाना है

ख्वाब मिले कुछ मीत मिले
अब तय दुःख का जाना है
हम साथ रहें आबाद रहें
मित्रो का यही फसाना हैं

शब्द नही हैं मेरे पास
कविता को कैसे सजाना हैं
अतिरेकी सज्जे को छोड़ो
अब काया कल्प कराना है

तुच्छ नही समझेजाएँगे
पैसे जो ट्रेजरी से आना है
कष्ठ सहे ताने खाये
अब कहे का शर्माना है

🙏🙏 महेंद्र राय🙏🙏

Language: Hindi
4 Likes · 2 Comments · 309 Views
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