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14 Feb 2023 · 1 min read

💐अज्ञात के प्रति-116💐

झूठे इश्क़ को क्यों ढाल रहे हो,तस्वीर के साँचे में?
तुम्हारे दिल की नेक इश्क़ की तस्वीर का मालिक हूँ मैं।

©®अभिषेक: पाराशरः ‘आनन्द’

Language: Hindi
154 Views
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