Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
4 Feb 2023 · 1 min read

जीवन एक गुलदस्ता ….. (मुक्तक)

जीवन एक गुलदस्ता ….. (मुक्तक)

जीवन एक गुलदस्ता फूलों भरा
गुलाब,चमेली,जसवंती सजी
हर फूल महकता भीनी खुशबू लिए ।

कभी फूल महकते इसमें अपार
काँटे चुभते कभी गहरे बार बार
काँटो से तुम हर पल बचना
संग प्यारे फूलों के महकना।

गुलाब से पाकर रंगत नई
चमेली ,मोगरे की सुगंध कई
हर फूल की सुगंध अनोखी
कुछ भीनी तो कभी तीव्र होती

जीवन का रंग भी इनके जैसा
हर फूल की अलग सी क्यारी
सुख-दुख आता बारी बारी।

दुख दर्द से ना घबराना
हर पौधे को सींचते जाना
सूखे डंठलों में से इक दिन
कोपल फिर नए उग आएंगे।

आशा, विश्वास को लेकर
नए पुष्प खिल जायेंगें
काँटो से सुंदर पुष्प चुनना
जीवन मे नए रंग भरना।

बगिया ये जीवन की खिल जाएगी
सुगन्ध से हर दिशा को सुवासित
कर जाएगी।

✍️ “कविता चौहान”
स्वरचित एवं मौलिक

747 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
*अमर शहीद राजा राम सिंह: जिनकी स्मृति में रामपुर रियासत का न
*अमर शहीद राजा राम सिंह: जिनकी स्मृति में रामपुर रियासत का न
Ravi Prakash
*
*"देश की आत्मा है हिंदी"*
Shashi kala vyas
स्त्रियों में ईश्वर, स्त्रियों का ताड़न
स्त्रियों में ईश्वर, स्त्रियों का ताड़न
Dr MusafiR BaithA
बारिश
बारिश
विजय कुमार अग्रवाल
" सीमाएँ "
Dr. Kishan tandon kranti
बुला लो
बुला लो
Dr.Pratibha Prakash
शाश्वत सत्य
शाश्वत सत्य
Dr.Priya Soni Khare
अपना सम्मान हमें ख़ुद ही करना पड़ता है। क्योंकी जो दूसरों से
अपना सम्मान हमें ख़ुद ही करना पड़ता है। क्योंकी जो दूसरों से
Sonam Puneet Dubey
रिश्ते नातों के बोझ को उठाए फिरता हूॅ॑
रिश्ते नातों के बोझ को उठाए फिरता हूॅ॑
VINOD CHAUHAN
अर्धांगिनी
अर्धांगिनी
Buddha Prakash
मन मेरे तू, सावन-सा बन...
मन मेरे तू, सावन-सा बन...
डॉ.सीमा अग्रवाल
हिन्दी दोहा बिषय-चरित्र
हिन्दी दोहा बिषय-चरित्र
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
# विचार
# विचार
DrLakshman Jha Parimal
*चाटुकार*
*चाटुकार*
Dushyant Kumar
■ ज़ुबान संभाल के...
■ ज़ुबान संभाल के...
*प्रणय प्रभात*
काफिला
काफिला
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
आज पलटे जो ख़्बाब के पन्ने - संदीप ठाकुर
आज पलटे जो ख़्बाब के पन्ने - संदीप ठाकुर
Sandeep Thakur
महफिल में तनहा जले, खूब हुए बदनाम ।
महफिल में तनहा जले, खूब हुए बदनाम ।
sushil sarna
" महखना "
Pushpraj Anant
2887.*पूर्णिका*
2887.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
*****नियति*****
*****नियति*****
Kavita Chouhan
Advice
Advice
Shyam Sundar Subramanian
चंद्रयान ३
चंद्रयान ३
प्रदीप कुमार गुप्ता
सजा दे ना आंगन फूल से रे माली
सजा दे ना आंगन फूल से रे माली
Basant Bhagawan Roy
जल रहें हैं, जल पड़ेंगे और जल - जल   के जलेंगे
जल रहें हैं, जल पड़ेंगे और जल - जल के जलेंगे
सिद्धार्थ गोरखपुरी
जब जब तुम्हे भुलाया
जब जब तुम्हे भुलाया
Bodhisatva kastooriya
3. कुपमंडक
3. कुपमंडक
Rajeev Dutta
कोई हादसा भी ज़रूरी है ज़िंदगी में,
कोई हादसा भी ज़रूरी है ज़िंदगी में,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
मैंने कभी भी अपने आप को इस भ्रम में नहीं रखा कि मेरी अनुपस्थ
मैंने कभी भी अपने आप को इस भ्रम में नहीं रखा कि मेरी अनुपस्थ
पूर्वार्थ
अपने मन के भाव में।
अपने मन के भाव में।
Vedha Singh
Loading...