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4 Oct 2016 · 1 min read

जरूरत

कौन है इस दुनिया में जो दूध का धुला हो
जिसके स्वभाव मे …धरती जैसी
सहनशीलता हो
और मन आकाश सा खुला हो
हर किसी मे होती है
तमाम सारी कमियां
मगर
जिन्दा रहने के लिए
जरूरी है कुछ गलतफहमियां
चलो गलतफहमियों को गले लगाएं
भीतर से कुछ भी हो
बाहर से भले हो जाएं

Language: Hindi
Tag: कविता
1 Comment · 379 Views
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