Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Settings

जमी हुई धूल

उस जमी हुई धूल को साफ़ मत करो
वक़्त के आईने पर पर्दा ज़रूरी होता है।
जो किस्सा भूल जाने में भलाई हो
उसे भूल जाओ.…….याद मत करो
जो छोड़कर जाने में अड़े हैं
उन्हें जाने दो……..फरियाद मत करो
उस जमी हुई धूल को साफ़ मत करो।

पलछिन लम्हा, लम्हें महीने और
महीने साल बन जाते हैं,
और वक़्त के आईने पर
फिर वही धूल जम जाती है।
भूल जाओ कि कौन छूटा
भूल जाओ कि क्यों दिल टूटा
वो जमी हुई धूल मरहम बन जाती है
उस मरहम को यूँहीं बर्बाद मत करो
उस जमी हुई धूल को साफ़ मत करो।

-जॉनी अहमद ‘क़ैस’

1 Like · 36 Views
You may also like:
ओ मेरे !....
ईश्वर दयाल गोस्वामी
कुछ लोग यूँ ही बदनाम नहीं होते...
मनोज कर्ण
गीत
शेख़ जाफ़र खान
नफरत की राजनीति...
मनोज कर्ण
✍️हिसाब ✍️
Vaishnavi Gupta
फ़ायदा कुछ नहीं वज़ाहत का ।
Dr fauzia Naseem shad
माँ की परिभाषा मैं दूँ कैसे?
साहित्य लेखन- एहसास और जज़्बात
उलझनें_जिन्दगी की
मनोज कर्ण
जितनी मीठी ज़ुबान रक्खेंगे
Dr fauzia Naseem shad
पिता
विजय कुमार 'विजय'
श्रीराम
सुरेखा कादियान 'सृजना'
ये दिल मेरा था, अब उनका हो गया
Ram Krishan Rastogi
माँ तुम अनोखी हो
Anamika Singh
इज़हार
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
पिता
Ram Krishan Rastogi
ओ मेरे साथी ! देखो
Anamika Singh
"सूखा गुलाब का फूल"
Ajit Kumar "Karn"
कुछ नहीं
Dr fauzia Naseem shad
भगवान हमारे पापा हैं
Lucky Rajesh
"पधारो, घर-घर आज कन्हाई.."
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
✍️काश की ऐसा हो पाता ✍️
Vaishnavi Gupta
जीवन-रथ के सारथि_पिता
मनोज कर्ण
मृगतृष्णा / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
सही गलत का
Dr fauzia Naseem shad
कोई मरहम
Dr fauzia Naseem shad
A wise man 'The Ambedkar'
Buddha Prakash
काश....! तू मौन ही रहता....
Dr. Pratibha Mahi
"पिता की क्षमता"
पंकज कुमार कर्ण
एक पनिहारिन की वेदना
Ram Krishan Rastogi
मेरा गांव
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
Loading...