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13 Jun 2023 · 1 min read

जगत का हिस्सा

हम जो बोयेगे,
वही तो काटेगे,
जो बोलेगे,
वही सुनेगे,
हम ,जानते हैं कि,
जो ,चाहते हैं,
वो ही पाते हैं,
फिर भी ,
वो हम ही है,
जो,औरो की ,
खुशी में,
उनके सुख में,
न खुश होते हैं,
न उसे पचा पाते हैं।
तब ,हम ,
खुद को ,
इस ,जगत का ,
हिस्सा, कैसे,
कह पाते है।

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