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10 Jun 2023 · 1 min read

छोड़ दिया

ज़ख्म क्या है,दिखाना छोड़ दिया।
गम क्या है,बताना छोड़ दिया।
आँखें नम हैं,जताना छोड़ दिया।
मुस्कुराहटें कायम हैं,दिल ने इतना तोड़ दिया।

✍️सृष्टि बंसल

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