Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
5 Mar 2024 · 1 min read

छलते हैं क्यों आजकल,

छलते हैं क्यों आजकल,
व्याकुल मन को मीत ।
सिर्फ देह को भोगना,
समझें अपनी जीत ।।

सुशील सरना / 5-3-24

55 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
और नहीं बस और नहीं, धरती पर हिंसा और नहीं
और नहीं बस और नहीं, धरती पर हिंसा और नहीं
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
2878.*पूर्णिका*
2878.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
महसूस होता है जमाने ने ,
महसूस होता है जमाने ने ,
ओनिका सेतिया 'अनु '
मानव  इनको हम कहें,
मानव इनको हम कहें,
sushil sarna
समीक्षा- रास्ता बनकर रहा (ग़ज़ल संग्रह)
समीक्षा- रास्ता बनकर रहा (ग़ज़ल संग्रह)
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
*रिश्वत ( कुंडलिया )*
*रिश्वत ( कुंडलिया )*
Ravi Prakash
दुखता बहुत है, जब कोई छोड़ के जाता है
दुखता बहुत है, जब कोई छोड़ के जाता है
Kumar lalit
" हैं पलाश इठलाये "
भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "
इंसान VS महान
इंसान VS महान
Dr MusafiR BaithA
बिल्ली की लक्ष्मण रेखा
बिल्ली की लक्ष्मण रेखा
Paras Nath Jha
"दुर्भाग्य"
Dr. Kishan tandon kranti
बदलती फितरत
बदलती फितरत
Sûrëkhâ
क्यों अब हम नए बन जाए?
क्यों अब हम नए बन जाए?
डॉ० रोहित कौशिक
अपनी अपनी बहन के घर भी आया जाया करो क्योंकि माता-पिता के बाद
अपनी अपनी बहन के घर भी आया जाया करो क्योंकि माता-पिता के बाद
Ranjeet kumar patre
मोक्ष
मोक्ष
Pratibha Pandey
The Saga Of That Unforgettable Pain
The Saga Of That Unforgettable Pain
Manisha Manjari
" मुरादें पूरी "
DrLakshman Jha Parimal
प्यार के ढाई अक्षर
प्यार के ढाई अक्षर
Juhi Grover
हे कलम तुम कवि के मन का विचार लिखो।
हे कलम तुम कवि के मन का विचार लिखो।
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
"वचन देती हूँ"
Ekta chitrangini
* रेत समंदर के...! *
* रेत समंदर के...! *
VEDANTA PATEL
मंजिल नई नहीं है
मंजिल नई नहीं है
Pankaj Sen
नया भारत
नया भारत
गुमनाम 'बाबा'
अगर मैं अपनी बात कहूँ
अगर मैं अपनी बात कहूँ
ruby kumari
मारुति
मारुति
Kavita Chouhan
!! सुविचार !!
!! सुविचार !!
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
जिंदगी जी कुछ अपनों में...
जिंदगी जी कुछ अपनों में...
Umender kumar
मायापति की माया!
मायापति की माया!
Sanjay ' शून्य'
Chhod aye hum wo galiya,
Chhod aye hum wo galiya,
Sakshi Tripathi
#तेवरी
#तेवरी
*Author प्रणय प्रभात*
Loading...