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5 May 2024 · 1 min read

चित्रकार

तुम स्वयं ही अपने चित्रकार
चल संवार अपना भाग्य संवार
अच्छी सोच सभ्य आचरण एवं
कर्मठता के प्रयासों से दे
स्वयं के जीवन को सुन्दर आकार
योग्यता अपनी-अपनी
बुद्धि, विवेक, एवं श्रम
की मथनी धैर्य,
लगन की स्याही
प्रयासों की की कूंजी
खोले भाग्य के द्वार
तुम स्वयं अपने चित्रकार
तो आगे बढ़ो
दृढ़ निश्चय की छैनी
कर्मठता का हथौड़ा
संवार अपना भाग्य संवार
तुम स्वयं ही अपने चित्रकार

1 Like · 33 Views
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