Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
27 Nov 2016 · 1 min read

चिंता क्‍यों हो रही है ?

लाईन में हम तो कल भी लगे थे,
आज भी लगे हैं,
और पूर्व की भाँति,
चंद लब्धि पाकर प्रफुल्लित हूँ,
पर आज उन्‍हें चिंता क्‍यों है ?

दिक्‍कतों का तो हमने किये हैं कई सामना,
नियति हमारी बन गई है करना संघर्ष,
हमने तो पहले भी कष्‍ट सहे हैं,
तब तो उन्‍हें चिंता नहीं हुई,
पर आज उन्‍हें चिंता क्‍यों है ?

हमें तो लाईन लगने की आदत है,
पहले भी तो लगे हैं,
ए.टी.एम., बैंकों और सरकारी दुकानों पर,
तब भी हमने झेले कई कष्‍टें,
तब तो उन्‍हें चिंता नहीं हुई,
पर आज उन्‍हें चिंता क्‍यों है ?

धार्मिक स्‍थलों पर भी लाईन लगा,
भगदड़ में हम कुचलेे गये,
घायल हुए, मारे भी गये,
तब तो उन्‍हें चिंता नहीं हुई,
पर आज उन्‍हें चिंता क्‍यों है ?

हमने कई बार सहे हैं कष्‍ट,
कितना सुनाउं दास्‍तान,
हमें तो परेशानियां झेलने की आदत हो गई है,
कभी भी उन्‍हें चिंता नहीं हुई,
पर आज उन्‍हें चिंता क्‍यों है ?

हम अपने लिए कष्‍ट सहते आये हैं,
अवसर मिला है राष्‍ट्र के लिए सहेगें,
कालाधन पर जब प्रहार हो गई है,
तब आज उन्‍हें चिंता क्‍यों है ?

चेहरे हो गये हैं उनके बेनकाब,
नोटबंदी से उनके मंसूबे हो गये हैं नाकाम,
काले चेहरे को ढकने को मांग रहे हैं अवसर,
समझ गये हैं हम,
आज उन्‍हें चिंता क्‍यों हो रही है ?

———— मनहरण

Language: Hindi
239 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
गंगा ....
गंगा ....
sushil sarna
समय को दोष देते हो....!
समय को दोष देते हो....!
Dr. Pratibha Mahi
बहुत समय बाद !
बहुत समय बाद !
Ranjana Verma
एक आंसू
एक आंसू
Surinder blackpen
जो रास्ते हमें चलना सीखाते हैं.....
जो रास्ते हमें चलना सीखाते हैं.....
कवि दीपक बवेजा
Dr. Arun Kumar shastri
Dr. Arun Kumar shastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
*घनश्याम (कुंडलिया)*
*घनश्याम (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
गर्व से कहो हम...
गर्व से कहो हम...
Shekhar Chandra Mitra
चांदनी रात
चांदनी रात
Mahender Singh Manu
इन्सानियत
इन्सानियत
Bodhisatva kastooriya
2826. *पूर्णिका*
2826. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
प्यारा सा गांव
प्यारा सा गांव
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
Pollution & Mental Health
Pollution & Mental Health
Tushar Jagawat
* मुस्कुराते नहीं *
* मुस्कुराते नहीं *
surenderpal vaidya
रमेशराज की बच्चा विषयक मुक्तछंद कविताएँ
रमेशराज की बच्चा विषयक मुक्तछंद कविताएँ
कवि रमेशराज
■ आदिकाल से प्रचलित एक कारगर नुस्खा।।
■ आदिकाल से प्रचलित एक कारगर नुस्खा।।
*Author प्रणय प्रभात*
फुटपाथ की ठंड
फुटपाथ की ठंड
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
उसने क़ीमत वसूल कर डाली
उसने क़ीमत वसूल कर डाली
Dr fauzia Naseem shad
"गीत"
Dr. Kishan tandon kranti
मानव और मशीनें
मानव और मशीनें
Mukesh Kumar Sonkar
किसान आंदोलन
किसान आंदोलन
मनोज कर्ण
जोशीमठ
जोशीमठ
Dr Archana Gupta
🇮🇳 मेरी माटी मेरा देश 🇮🇳
🇮🇳 मेरी माटी मेरा देश 🇮🇳
Dr Manju Saini
क्या पता है तुम्हें
क्या पता है तुम्हें
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
इन वादियों में फिज़ा फिर लौटकर आएगी,
इन वादियों में फिज़ा फिर लौटकर आएगी,
करन ''केसरा''
रूप पर अनुरक्त होकर आयु की अभिव्यंजिका है
रूप पर अनुरक्त होकर आयु की अभिव्यंजिका है
महेश चन्द्र त्रिपाठी
ओ चाँद गगन के....
ओ चाँद गगन के....
डॉ.सीमा अग्रवाल
आख़री तकिया कलाम
आख़री तकिया कलाम
Rohit yadav
अलगौझा
अलगौझा
भवानी सिंह धानका "भूधर"
वर्षा ऋतु के बाद
वर्षा ऋतु के बाद
लक्ष्मी सिंह
Loading...