Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
5 May 2023 · 1 min read

चाँद से बातचीत

चाँद से बातचीत
~~°~~°~~°
सायं पीला चाँद,दिखा था नभ पर,
पुलकित विहस रहा वो मुझ पर ।
कहता मुझको दूर गगन से ,
ध्यान पड़ा है,क्यूँ इतने दिनों पर ।

अंधियारे और उजियारे में ,
हर पल तेरे संग-संग रहता ।
नजर तभी आता हूँ तुझको ,
आसमान में जब तारे होता ।

धरा के फेरे अहर्निश अनवरत करता,
दिवाकाल अनन्त नभ में ही होता ।
पर रवि किरणों से धुमिल मुखमंडल ,
दिन दुपहरी नभ दिख नहीं पाता।

याद करो बचपन की बातें ,
केसरिया था वो रुप सलोना ।
मामा बनकर तुझे खिलाता ,
दूध भात लिए कटोरी में खाना ।

भूल गया फिर,तू जो मुझको ,
खेल खिलौने में,बहलाता खुद को।
महबूबा को ही चांद था कहता ,
तरूण बना जब, देख प्रियतम को ।

मैं तो नित्य दिन रुप बदलता ,
फीका मद्धिम कुछ रंग संवरता ।
बिखेरकर अपनी शीतल चांदनी ,
रात गगन हर पल मुस्काता ।

कभी कभी बस,यूँ ही मुझसे ,
दीदार करो,निगाहे-ए-यार के जैसे।
फ़लक से उतरकर मैं ,जमीं पर आऊँ ,
ख्वाहिशों में तेरे, अमृतघट बन जाऊँ ।

मौलिक और स्वरचित
सर्वाधिकार सुरक्षित
© ® मनोज कुमार कर्ण
कटिहार ( बिहार )
तिथि – ०५ /०५ /२०२३
वैशाख , शुक्ल पक्ष , पूर्णिमा ,शुक्रवार
विक्रम संवत २०८०
मोबाइल न. – 8757227201
ई-मेल – mk65ktr@gmail.com

1 Like · 513 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from मनोज कर्ण
View all
You may also like:
पधारो मेरे प्रदेश तुम, मेरे राजस्थान में
पधारो मेरे प्रदेश तुम, मेरे राजस्थान में
gurudeenverma198
लेती है मेरा इम्तिहान ,कैसे देखिए
लेती है मेरा इम्तिहान ,कैसे देखिए
Shweta Soni
मैंने, निज मत का दान किया;
मैंने, निज मत का दान किया;
पंकज कुमार कर्ण
पार्थगाथा
पार्थगाथा
Vivek saswat Shukla
"परिवार एक सुखद यात्रा"
Ekta chitrangini
23/182.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/182.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
देह अधूरी रूह बिन, औ सरिता बिन नीर ।
देह अधूरी रूह बिन, औ सरिता बिन नीर ।
Arvind trivedi
उसको फिर उसका
उसको फिर उसका
Dr fauzia Naseem shad
जबरदस्त विचार~
जबरदस्त विचार~
दिनेश एल० "जैहिंद"
है शारदे मां
है शारदे मां
नेताम आर सी
Still I rise!
Still I rise!
Sridevi Sridhar
ऐ जिन्दगी मैने तुम्हारा
ऐ जिन्दगी मैने तुम्हारा
पूर्वार्थ
तबीयत मचल गई
तबीयत मचल गई
Surinder blackpen
*दफ्तरों में बाबू का महत्व (हास्य व्यंग्य)*
*दफ्तरों में बाबू का महत्व (हास्य व्यंग्य)*
Ravi Prakash
मुक्तक
मुक्तक
डॉक्टर रागिनी
ग़ज़ल
ग़ज़ल
ईश्वर दयाल गोस्वामी
उपहार
उपहार
Dr. Pradeep Kumar Sharma
"गहराई में बसी है"
Dr. Kishan tandon kranti
रंगोली
रंगोली
Neelam Sharma
बस कुछ दिन और फिर हैप्पी न्यू ईयर और सेम टू यू का ऐसा तांडव
बस कुछ दिन और फिर हैप्पी न्यू ईयर और सेम टू यू का ऐसा तांडव
Ranjeet kumar patre
जीभ का कमाल
जीभ का कमाल
विजय कुमार अग्रवाल
Speak with your work not with your words
Speak with your work not with your words
Nupur Pathak
शिक्षक दिवस
शिक्षक दिवस
पाण्डेय चिदानन्द "चिद्रूप"
बेसबब हैं ऐशो इशरत के मकाँ
बेसबब हैं ऐशो इशरत के मकाँ
अरशद रसूल बदायूंनी
प्रभु पावन कर दो मन मेरा , प्रभु पावन तन मेरा
प्रभु पावन कर दो मन मेरा , प्रभु पावन तन मेरा
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
होना जरूरी होता है हर रिश्ते में विश्वास का
होना जरूरी होता है हर रिश्ते में विश्वास का
Mangilal 713
प्रभु श्रीराम
प्रभु श्रीराम
Dr. Upasana Pandey
ईव्हीएम को रोने वाले अब वेलेट पेपर से भी नहीं जीत सकते। मतपत
ईव्हीएम को रोने वाले अब वेलेट पेपर से भी नहीं जीत सकते। मतपत
*Author प्रणय प्रभात*
*जब हो जाता है प्यार किसी से*
*जब हो जाता है प्यार किसी से*
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
जिंदगी के रंगमंच में हम सभी किरदार है
जिंदगी के रंगमंच में हम सभी किरदार है
Neeraj Agarwal
Loading...