Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
Jul 8, 2016 · 1 min read

चाँद तुमको समझने लगे हैं।

वो तूफानों से यूूं दूर रहने लगे हैं।
संभल के बहुत वो चलने लगे हैं।

मिला जब से फरेब अपनो से है
हर कदम पे रूक के चलने लगे हैं।

सितारों की तमन्ना तो न की थी
अपना चाँद तुमके समझने लगे हैं।

शहर में अब के भीड़ बहुत थी मगर
कदम तुझे देख के ही रूकने लगे हैं।।।
कामनी गुप्ता***

114 Views
You may also like:
मुर्झाए हुए फूल तरछोडे जाते हैं....
Dr. Alpa H. Amin
अन्तर्मन ....
Chandra Prakash Patel
सबको हार्दिक शुभकामनाएं !
Prabhudayal Raniwal
योगा
Utsav Kumar Aarya
डरता हूं
dks.lhp
*प्रखर राष्ट्रवादी श्री रामरूप गुप्त*
Ravi Prakash
✍️मुमकिन था..!✍️
"अशांत" शेखर
विश्व पुस्तक दिवस पर पुस्तको की वेदना
Ram Krishan Rastogi
काबुल का दंश
डा. सूर्यनारायण पाण्डेय
Human Brain
Buddha Prakash
✍️अश्क़ का खारा पानी ✍️
"अशांत" शेखर
1-अश्म पर यह तेरा नाम मैंने लिखा2- अश्म पर मेरा...
Pt. Brajesh Kumar Nayak
"मेरे पापा "
Usha Sharma
प्रेयसी
Dr. Sunita Singh
दोस्ती अपनी जगह है आशिकी अपनी जगह
Dr.SAGHEER AHMAD SIDDIQUI
हाइकु_रिश्ते
Manu Vashistha
नियत मे पर्दा
Vikas Sharma'Shivaaya'
आइना हूं मैं
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
मज़दूर की महत्ता
Dr. Alpa H. Amin
मदहोश रहे सदा।
Taj Mohammad
पितृ महिमा
मनोज कर्ण
पिता
पूनम झा 'प्रथमा'
माँ
DR ARUN KUMAR SHASTRI
पहले वाली मोहब्बत।
Taj Mohammad
इश्क ए दास्तां को।
Taj Mohammad
चल-चल रे मन
Anamika Singh
मौत ने की हमसे साज़िश।
Taj Mohammad
✍️किसान की आत्मकथा✍️
"अशांत" शेखर
*•* रचा है जो परमेश्वर तुझको *•*
Arise DGRJ (Khaimsingh Saini)
पिता
Raju Gajbhiye
Loading...