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25 Oct 2016 · 1 min read

चाँद को देखकर चाँद कहने लगा,

तरही गजल-

चाँद को देखकर चाँद कहने लगा,
ईद की ही तरह अब तु मिलने लगा,
————————————————
बेरुखी से हमें देख के चल दिये,
दिल उदासी के’ सूरज सा’ ढलने लगा,

आपकी बेरुखी अब न ये सह सका,
शख्स ये खुद ब खुद आज मरने लगा,

थी तङप मिलन की कुछ उसे इस तरह,
हर किनारा नदी संग चलने लगा,

जब मिला साथ तेरा न मुझको सनम,
रेत के महल सा मैं तो’ ढहने लगा,

आज सैलाब ऐसा है’ आया सुनो,
आंसुओं में सभी कुछ है’ बहने लगा।

पुष्प ठाकुर

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