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चमचागिरी

आओ चमचागिरी
करते है

एक चम्मच तुम लगाओ
फिर हम लगाते हैं
धरती से आसमान में
उठाते हैं

चम्मच भी तो यही करती है
नीचे से उठती और
मुँह तक जाती है।

किसी को उठाने में,
भला
हमारा क्या जाता है
धरती का आदमी
धरती पर आ जाता है।

सूर्यकांत द्विवेदी

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