Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame

गज़ल (ख्बाब)

गज़ल (ख्बाब)

ख्बाब था मेहनत के बल पर , हम बदल डालेंगे किस्मत
ख्बाब केवल ख्बाब बनकर, अब हमारे रह गए हैं

कामचोरी, धूर्तता, चमचागिरी का अब चलन है
बेअरथ से लगने लगे है ,युग पुरुष जो कह गए हैं

दूसरों का किस तरह नुकसान हो सब सोचते है
त्याग ,करुना, प्रेम ,क्यों इस जहाँ से बह गए हैं

अब करा करता है शोषण ,आजकल बीरों का पौरुष
मानकर बिधि का विधान, जुल्म हम सब सह गए हैं

नाज हमको था कभी पर, आज सर झुकता शर्म से
कल तलक जो थे सुरक्षित आज सारे ढह गए हैं

गज़ल (ख्बाब)
मदन मोहन सक्सेना

140 Views
You may also like:
✍️✍️ओढ✍️✍️
"अशांत" शेखर
अन्तर्मन ....
Chandra Prakash Patel
आपके जाने के बाद
pradeep nagarwal
"शौर्यम..दक्षम..युध्धेय, बलिदान परम धर्मा" अर्थात- बहादुरी वह है जो आपको...
Lohit Tamta
नई जिंदगानी
AMRESH KUMAR VERMA
कन्यादान क्यों और किसलिए [भाग८]
Anamika Singh
स्वादिष्ट खीर
Buddha Prakash
🌷"फूलों की तरह जीना है"🌷
पंकज कुमार "कर्ण"
प्रेरक संस्मरण
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
जन्म दिन की बधाई..... दोस्त को...
Dr. Alpa H. Amin
【31】*!* तूफानों से क्यों झुकना *!*
Arise DGRJ (Khaimsingh Saini)
मानव स्वरूपे ईश्वर का अवतार " पिता "  
Dr. Alpa H. Amin
My Expressions
Shyam Sundar Subramanian
✍️कोरोना✍️
"अशांत" शेखर
आईना झूठ लगे
VINOD KUMAR CHAUHAN
संकरण हो गया
सिद्धार्थ गोरखपुरी
श्रीराम
सुरेखा कादियान 'सृजना'
फूलो की कहानी,मेरी जुबानी
Anamika Singh
इश्क में तन्हाईयां बहुत है।
Taj Mohammad
आशाओं के दीप.....
Chandra Prakash Patel
सुहावना मौसम
AMRESH KUMAR VERMA
तुम्हारा हर अश्क।
Taj Mohammad
"कर्मफल
Vikas Sharma'Shivaaya'
कविता संग्रह
श्याम सिंह बिष्ट
क्या देखें हम...
सूर्यकांत द्विवेदी
आईनें में सूरत।
Taj Mohammad
मेरी गुड़िया (संस्मरण)
Kanchan Khanna
बारी है
वीर कुमार जैन 'अकेला'
चेहरा
शिव प्रताप लोधी
बॉर्डर पर किसान
Shriyansh Gupta
Loading...