Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
15 Feb 2017 · 1 min read

गौरा-गौरा बोलिये, भोला दौड़े आय।

????
गौरा-गौरा बोलिये,भोला दौड़े आय।
गौरा को सुमरिये,भोला होगे सहाय।

गौरा पूजन जो करे,सुहागन के वर पाय।
गौरा के सुमिरन करे,भवसागर तर जाय।

बिन गौरा के संग ,भोला जाते हैं बौराय।
तभी तो गौरा भोला के,तन में गई समाय।

भोला-भोला सब कहे,गौरा कहे ना कोय।
भोला के दरवार में,गौरा कहे सो होय।
????—लक्ष्मी सिंह

Language: Hindi
1 Like · 358 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from लक्ष्मी सिंह
View all
You may also like:
चाँद
चाँद
TARAN VERMA
अगर वास्तव में हम अपने सामर्थ्य के अनुसार कार्य करें,तो दूसर
अगर वास्तव में हम अपने सामर्थ्य के अनुसार कार्य करें,तो दूसर
Paras Nath Jha
दो शे'र
दो शे'र
डॉक्टर वासिफ़ काज़ी
नजरअंदाज करने के
नजरअंदाज करने के
Dr Manju Saini
मुक्ति मिली सारंग से,
मुक्ति मिली सारंग से,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
R J Meditation Centre
R J Meditation Centre
Ravikesh Jha
विचार , हिंदी शायरी
विचार , हिंदी शायरी
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
जिंदगी.... कितनी ...आसान.... होती
जिंदगी.... कितनी ...आसान.... होती
Dheerja Sharma
मां
मां
goutam shaw
अच्छा होगा
अच्छा होगा
Madhuyanka Raj
लोग एक दूसरे को परखने में इतने व्यस्त हुए
लोग एक दूसरे को परखने में इतने व्यस्त हुए
ruby kumari
पेड़ पौधे (ताटंक छन्द)
पेड़ पौधे (ताटंक छन्द)
नाथ सोनांचली
सावन मास निराला
सावन मास निराला
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
3466🌷 *पूर्णिका* 🌷
3466🌷 *पूर्णिका* 🌷
Dr.Khedu Bharti
रह जाता सब कुछ धरा ,मरने के फिर बाद(कुंडलिया)*
रह जाता सब कुछ धरा ,मरने के फिर बाद(कुंडलिया)*
Ravi Prakash
प्यार करता हूं और निभाना चाहता हूं
प्यार करता हूं और निभाना चाहता हूं
इंजी. संजय श्रीवास्तव
■ पता नहीं इतनी सी बात स्वयम्भू विश्वगुरुओं को समझ में क्यों
■ पता नहीं इतनी सी बात स्वयम्भू विश्वगुरुओं को समझ में क्यों
*Author प्रणय प्रभात*
Lonely is just a word which can't make you so,
Lonely is just a word which can't make you so,
Sukoon
(12) भूख
(12) भूख
Kishore Nigam
माटी में है मां की ममता
माटी में है मां की ममता
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
"घोषणा"
Dr. Kishan tandon kranti
धनमद
धनमद
Sanjay ' शून्य'
किसी का यकीन
किसी का यकीन
Dr fauzia Naseem shad
" लक्ष्य सिर्फ परमात्मा ही हैं। "
Aryan Raj
गुरूता बने महान ......!
गुरूता बने महान ......!
हरवंश हृदय
कठपुतली की क्या औकात
कठपुतली की क्या औकात
Satish Srijan
कुंडलिनी छंद
कुंडलिनी छंद
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
यादें
यादें
Tarkeshwari 'sudhi'
** मुक्तक **
** मुक्तक **
surenderpal vaidya
कभी लगते थे, तेरे आवाज़ बहुत अच्छे
कभी लगते थे, तेरे आवाज़ बहुत अच्छे
Anand Kumar
Loading...