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21 Aug 2023 · 1 min read

गुमराह जिंदगी में अब चाह है किसे

गुमराह जिंदगी में अब चाह है किसे
जो चाह, चाह में थी अब वो चाह में नहीं
-सिद्धार्थ गोरखपुरी

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