Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
26 Jan 2017 · 2 min read

गीत सुनाने निकली हूँ

भारत माँ की बेटी हूँ और गीत सुनाने निकली हूँ,
वीरों की गाथा को जन जन तक पहुँचाने निकली हूँ,
भारत माँ के शान के खातिर सरहद पर तुम ड़टे रहे,
सर्दी गर्मी बरसातों में भी तुम अड़िग वीर बन खड़े रहे,
कोई माँ कहती है कि मेरा लाल गया है सीमा पर,
दुश्मन को हुँकारों से ललकार रहा है सीमा पर,
उनकी देशभक्ति एक सच्ची मिशाल दिखाई देती है,
हर सरहद पर जय हिन्द की एक गूँज सुनाई देती है,
मेरी कलम सतत् चल करके गौरव गाथा लिखती है,
वीरों की अमर शहादत पर ये आँसू आँसू दिखती है,
अड़तालीस पैसठ इकहत्तर के बरस सुहाने बीत गए,
पाक तुम्हारी गुस्ताखी पर कड़ा प्रहार हर बार किए,
वीर शहीदों की यादों में दीप जलाने निकली हूँ,
भारत माँ की बेटी हूँ और गीत सुनाने निकली हूँ .

पाक कभी तुम न भूलो की हिन्द वतन के बेटे हो,
ठण्ड़ी चिंगारी को क्यों हर बार जला तुम देते हो,
तुम्हे गुरूर है उन सांपों पर जिनको दूध पिलाते हो,
समय समय पर उन सांपों से तुम खुद काटे जाते हो,
एक बात बताऊ पाक तुम्हे तुम कान खोलकर सुन लेना,
यदि जीना है तुमको तो जेहादी मंसूबों को छोड़ ही लेना,
वरना वीरों की टोली इस बार लाहौर तक जाएगी,
इतिहास नहीं इस बार भूगोल बदल दी जाएगी,
इन वीरों के शौर्य गान को गर्व समझकर गाती हूँ,
अदना सी मै कलमकार हूँ दिनकर की परिपाटी हूँ,
सच कहती हूँ ऐ वीरों तुम हिन्द वतन की शान हो,
गौरव और अमिट गाथा की तुम ही एक पहचान हो,
हिन्द वतन के वीरों की ललकार सुनाने निकली हूँ,
भारत माँ की बेटी हूँ और गीत सुनाने निकली हूँ.

भारत माता – अमर रहें

Language: Hindi
1 Like · 258 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
ग़ज़ल
ग़ज़ल
प्रीतम श्रावस्तवी
अधरों पर शतदल खिले, रुख़ पर खिले गुलाब।
अधरों पर शतदल खिले, रुख़ पर खिले गुलाब।
डॉ.सीमा अग्रवाल
कीच कीच
कीच कीच
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
शायरी 2
शायरी 2
SURYAA
सितम तो ऐसा कि हम उसको छू नहीं सकते,
सितम तो ऐसा कि हम उसको छू नहीं सकते,
Vishal babu (vishu)
अन्याय के आगे मत झुकना
अन्याय के आगे मत झुकना
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
जीवन में सफल होने
जीवन में सफल होने
Dr.Rashmi Mishra
" मंजिल का पता ना दो "
Aarti sirsat
अजान
अजान
Satish Srijan
निराला जी पर दोहा
निराला जी पर दोहा
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
हम वर्षों तक निःशब्द ,संवेदनरहित और अकर्मण्यता के चादर को ओढ़
हम वर्षों तक निःशब्द ,संवेदनरहित और अकर्मण्यता के चादर को ओढ़
DrLakshman Jha Parimal
2319.पूर्णिका
2319.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
लहरे बहुत है दिल मे दबा कर रखा है , काश ! जाना होता है, समुन
लहरे बहुत है दिल मे दबा कर रखा है , काश ! जाना होता है, समुन
Rohit yadav
*कहने को सौ बरस की, कहानी है जिंदगी (हिंदी गजल/ गीतिका)*
*कहने को सौ बरस की, कहानी है जिंदगी (हिंदी गजल/ गीतिका)*
Ravi Prakash
गांव में छुट्टियां
गांव में छुट्टियां
Manu Vashistha
प्यार की बात है कैसे कहूं तुम्हें
प्यार की बात है कैसे कहूं तुम्हें
Er Sanjay Shrivastava
ये पहाड़ कायम है रहते ।
ये पहाड़ कायम है रहते ।
Buddha Prakash
■ आज का चिंतन...
■ आज का चिंतन...
*Author प्रणय प्रभात*
साथ जब चाहा था
साथ जब चाहा था
Ranjana Verma
पृथ्वीराज
पृथ्वीराज
Sandeep Pande
फैलाकर खुशबू दुनिया से जाने के लिए
फैलाकर खुशबू दुनिया से जाने के लिए
कवि दीपक बवेजा
Ranjeet Shukla
Ranjeet Shukla
Ranjeet Kumar Shukla
कान्हा मन किससे कहे, अपने ग़म की बात ।
कान्हा मन किससे कहे, अपने ग़म की बात ।
सूर्यकांत द्विवेदी
ग़ज़ल
ग़ज़ल
वैभव बेख़बर
डिगरी नाहीं देखाएंगे
डिगरी नाहीं देखाएंगे
Shekhar Chandra Mitra
💐अज्ञात के प्रति-24💐
💐अज्ञात के प्रति-24💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
*हे महादेव आप दया के सागर है मैं विनती करती हूं कि मुझे क्षम
*हे महादेव आप दया के सागर है मैं विनती करती हूं कि मुझे क्षम
Shashi kala vyas
न रोजी न रोटी, हैं जीने के लाले।
न रोजी न रोटी, हैं जीने के लाले।
सत्य कुमार प्रेमी
हूं बहारों का मौसम
हूं बहारों का मौसम
साहित्य गौरव
"कहाँ नहीं है राख?"
Dr. Kishan tandon kranti
Loading...