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7 Mar 2023 · 1 min read

ग़ज़ल

छोटी बहुत ही लगती है तब कद में शायरी
होती है जब किसी की खुशामद में शायरी

पहले विधान बनते थे होती थी मंत्रणा
अब हो रही है देश की संसद में शायरी

जब सब के हक़ की बात उठाने लगी ग़ज़ल
कहने लगे हैं वो कि रहे हद में शायरी

जब एक दिल की आग लगे दूसरे में तो
समझो कि कामयाब है मक़सद में शायरी

जलता है ख़ून दिल का तो बनता है शेर ‘नूर’
फलती नहीं है आम या बरगद में शायरी

✍️ जितेन्द्र कुमार ‘नूर’
असिस्टेंट प्रोफेसर
डी ए वी पी जी कॉलेज आज़मगढ़

Language: Hindi
3 Likes · 477 Views
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