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23 Oct 2023 · 1 min read

खामोशियां आवाज़ करती हैं

खामोशियां आवाज़ है , मेरे जज्बात की।
लब तक जो न आये, ऐसे सवालात की।

अधूरी ,रिक्त बेबस सी वो मेरी हसरतें
चीखती चुप के ,वो शोर भरे लम्हात की ।

समेटती रहती है ,जिसे ख़ामोश धड़कने
बिखरी हुई है जो लाशें ख्यालात की।

कानों में रह रह कर, जो गूंजती रहती हैं
धुनें इश्क़ में गाये , दर्द भरे नग्मात की ।

कौन समझेगा मेरे, ये ख़ामोश लहज़ा
किसे बताएं तल्खियां ऐसे हालात की।

सुरिंदर कौर

Language: Hindi
49 Views
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