Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
10 Apr 2024 · 1 min read

“खतरनाक”

“खतरनाक”
दुविधा और सुविधा हद से अधिक होने पर खतरनाक है। अत्यधिक दुविधा निर्णय क्षमता को प्रभावित करती है, जबकि सत्यधिक सुविधा तरक्की में बाधक बन जाती है।

1 Like · 1 Comment · 32 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr. Kishan tandon kranti
View all
You may also like:
बचपन मेरा..!
बचपन मेरा..!
भवेश
The unknown road.
The unknown road.
Manisha Manjari
सोने को जमीं,ओढ़ने को आसमान रखिए
सोने को जमीं,ओढ़ने को आसमान रखिए
Anil Mishra Prahari
मेरी कानपुर से नई दिल्ली की यात्रा का वृतान्त:-
मेरी कानपुर से नई दिल्ली की यात्रा का वृतान्त:-
Adarsh Awasthi
देव विनायक वंदना
देव विनायक वंदना
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
कैसे हो गया बेखबर तू , हमें छोड़कर जाने वाले
कैसे हो गया बेखबर तू , हमें छोड़कर जाने वाले
gurudeenverma198
बीज और विचित्रताओं पर कुछ बात
बीज और विचित्रताओं पर कुछ बात
Dr MusafiR BaithA
यूं ही नहीं हमने नज़र आपसे फेर ली हैं,
यूं ही नहीं हमने नज़र आपसे फेर ली हैं,
ओसमणी साहू 'ओश'
अक्सर कोई तारा जमी पर टूटकर
अक्सर कोई तारा जमी पर टूटकर
'अशांत' शेखर
3047.*पूर्णिका*
3047.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
जिंदगी
जिंदगी
विजय कुमार अग्रवाल
संविधान से, ये देश चलता,
संविधान से, ये देश चलता,
SPK Sachin Lodhi
चाहता हूं
चाहता हूं
Er. Sanjay Shrivastava
"कैफियत"
Dr. Kishan tandon kranti
गुजरते लम्हों से कुछ पल तुम्हारे लिए चुरा लिए हमने,
गुजरते लम्हों से कुछ पल तुम्हारे लिए चुरा लिए हमने,
Hanuman Ramawat
कुछ तो उन्होंने भी कहा होगा
कुछ तो उन्होंने भी कहा होगा
पूर्वार्थ
ख़त पहुंचे भगतसिंह को
ख़त पहुंचे भगतसिंह को
Shekhar Chandra Mitra
अच्छाई बाहर नहीं अन्दर ढूंढो, सुन्दरता कपड़ों में नहीं व्यवह
अच्छाई बाहर नहीं अन्दर ढूंढो, सुन्दरता कपड़ों में नहीं व्यवह
लोकेश शर्मा 'अवस्थी'
सर्दियों की धूप
सर्दियों की धूप
Vandna Thakur
नारी कब होगी अत्याचारों से मुक्त?
नारी कब होगी अत्याचारों से मुक्त?
कवि रमेशराज
इज़हार ए मोहब्बत
इज़हार ए मोहब्बत
Surinder blackpen
* बाल विवाह मुक्त भारत *
* बाल विवाह मुक्त भारत *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
*पतंग (बाल कविता)*
*पतंग (बाल कविता)*
Ravi Prakash
इश्क में ज़िंदगी
इश्क में ज़िंदगी
Dr fauzia Naseem shad
मेरी माटी मेरा देश भाव
मेरी माटी मेरा देश भाव
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
तुमसा तो कान्हा कोई
तुमसा तो कान्हा कोई
Harminder Kaur
ओ माँ... पतित-पावनी....
ओ माँ... पतित-पावनी....
Santosh Soni
रंगरेज कहां है
रंगरेज कहां है
Shiva Awasthi
18- ऐ भारत में रहने वालों
18- ऐ भारत में रहने वालों
Ajay Kumar Vimal
विडम्बना की बात है कि
विडम्बना की बात है कि
*Author प्रणय प्रभात*
Loading...