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क्रांति

*गीतिका*
वतन में उपद्रव बहुत छा गया है।
पुनः क्रांति का अब समय आ गया है।

चढा जा रहा चीन उसको भुला दो ।
हमें लूट आंखे दिखाता गया है।

न भारत की’ सेवा से’ मोडे कभी मुख।
जिसे राष्ट्र से भक्ति सुख भा गया है।

बढाते चलो राष्ट्र अपना शिखर तक।
यही राष्ट्र हमको बढाता गया है।

पडो लोभ में मत बनो मूर्ख मत तुम।
यही शास्त्र सबको सिखाता गया है।

अंकित शर्मा’ इषुप्रिय’
रामपुर कलाँ,सबलगढ(म.प्र.)

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