Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
25 Feb 2017 · 1 min read

क्या मुर्दे भी कभी कुछ सोचते हैं

ना मैं कुछ देख सकता हूँ
ना सुन सकता हूँ
और ना ही मैं कुछ
बोल सकता हूँ

मैं नहीं जानना चाहता
क्या हो रहा है मेरे आसपास
कौन जिन्दा है
और कौन मर रहा

मैं तो मशगूल हूँ बस
अपनी ही दुनिया में
और घुल रहा हूँ अपनी
रोटी-रोजी की चिंता में

मुझमें नहीं है क्षमता
सोचने, समझने
और कुछ भी
बूझने की

सोचने समझने का काम
तो इंसान करते हैं
और मुझे लगता है कि
मैं इंसान ही नहीं रहा

मैं तो बन गया हूँ बस
एक चलता-फिरता मुर्दा
और तुम ही कहो
क्या मुर्दे भी कभी कुछ सोचते हैं

लोधी डॉ. आशा ‘अदिति’
भोपाल

Language: Hindi
1 Like · 1 Comment · 797 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
कविता
कविता
Rambali Mishra
वैसे कार्यों को करने से हमेशा परहेज करें जैसा कार्य आप चाहते
वैसे कार्यों को करने से हमेशा परहेज करें जैसा कार्य आप चाहते
Paras Nath Jha
जिसे पश्चिम बंगाल में
जिसे पश्चिम बंगाल में
*Author प्रणय प्रभात*
फिलिस्तीन इजराइल युद्ध
फिलिस्तीन इजराइल युद्ध
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
यह जीवन अनमोल रे
यह जीवन अनमोल रे
विजय कुमार अग्रवाल
कहाॅं तुम पौन हो।
कहाॅं तुम पौन हो।
Pt. Brajesh Kumar Nayak
इस ठग को क्या नाम दें
इस ठग को क्या नाम दें
gurudeenverma198
के अब चराग़ भी शर्माते हैं देख तेरी सादगी को,
के अब चराग़ भी शर्माते हैं देख तेरी सादगी को,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
दुनिया की हर वोली भाषा को मेरा नमस्कार 🙏🎉
दुनिया की हर वोली भाषा को मेरा नमस्कार 🙏🎉
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
"चाँद बीबी"
Dr. Kishan tandon kranti
तुम मुझे देखकर मुस्कुराने लगे
तुम मुझे देखकर मुस्कुराने लगे
नंदलाल सिंह 'कांतिपति'
नए मुहावरे का चाँद
नए मुहावरे का चाँद
Dr MusafiR BaithA
भारत देश
भारत देश
लक्ष्मी सिंह
बिखरने की सौ बातें होंगी,
बिखरने की सौ बातें होंगी,
Vishal babu (vishu)
सूरज सा उगता भविष्य
सूरज सा उगता भविष्य
Harminder Kaur
Wo veer purta jo rote nhi
Wo veer purta jo rote nhi
Sakshi Tripathi
*क्या देखते हो *
*क्या देखते हो *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
23/54.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/54.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
कुछ एक आशू, कुछ एक आखों में होगा,
कुछ एक आशू, कुछ एक आखों में होगा,
goutam shaw
!..............!
!..............!
शेखर सिंह
दर्द का बस
दर्द का बस
Dr fauzia Naseem shad
खुले लोकतंत्र में पशु तंत्र ही सबसे बड़ा हथियार है
खुले लोकतंत्र में पशु तंत्र ही सबसे बड़ा हथियार है
प्रेमदास वसु सुरेखा
पश्चाताप का खजाना
पश्चाताप का खजाना
अशोक कुमार ढोरिया
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Neelam Sharma
हम अपनी आवारगी से डरते हैं
हम अपनी आवारगी से डरते हैं
Surinder blackpen
पैगाम डॉ अंबेडकर का
पैगाम डॉ अंबेडकर का
Buddha Prakash
गज़ल सी कविता
गज़ल सी कविता
Kanchan Khanna
सुनें   सभी   सनातनी
सुनें सभी सनातनी
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
विद्यार्थी जीवन
विद्यार्थी जीवन
Santosh kumar Miri
---- विश्वगुरु ----
---- विश्वगुरु ----
सूरज राम आदित्य (Suraj Ram Aditya)
Loading...