Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
29 Aug 2016 · 1 min read

क्या आँच दे सकेंगे बुझते हुए शरारे

गुल सूख जाए हर इक या ग़ुम हों चाँद तारे
गाएंगे लोग फिर भी याँ गीत प्यारे प्यारे

ऐ अब्र! है बरसना तो झूमकर बरस जा
है गर महज़ टहलना तो फिर यहाँ से जा रे!

गोया के आ रहे हैं अब तक सँभालते ही
पागल नदी को फिर भी दिखते नहीं किनारे

डालो अलाव में जी! कुछ और अब जलावन
क्या आँच दे सकेंगे बुझते हुए शरारे

तुर्रा है यह के उल्फ़त ख़ंजर की धार सी है
और उसपे रक्स को हैं बेताब लोग सारे

वह बेल इश्क़ वाली सरसब्ज़ क्या रहेगी
ग़ाफ़िल रहेे जो तेरे शाने के ही सहारे

-‘ग़ाफ़िल’

384 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
देन वाले
देन वाले
SHALINI RAI
तू मिला जो मुझे इक हंसी मिल गई
तू मिला जो मुझे इक हंसी मिल गई
कृष्णकांत गुर्जर
जागो बहन जगा दे देश 🙏
जागो बहन जगा दे देश 🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
खतरनाक आदमी / मुसाफ़िर बैठा
खतरनाक आदमी / मुसाफ़िर बैठा
Dr MusafiR BaithA
परिस्थितियॉं बदल गईं ( लघु कथा)
परिस्थितियॉं बदल गईं ( लघु कथा)
Ravi Prakash
"" *जब तुम हमें मिले* ""
सुनीलानंद महंत
मुझे गर्व है अलीगढ़ पर #रमेशराज
मुझे गर्व है अलीगढ़ पर #रमेशराज
कवि रमेशराज
जिंदगी
जिंदगी
विजय कुमार अग्रवाल
Jo Apna Nahin 💔💔
Jo Apna Nahin 💔💔
Yash mehra
हिलोरे लेता है
हिलोरे लेता है
हिमांशु Kulshrestha
गुड़िया
गुड़िया
Dr. Pradeep Kumar Sharma
* राष्ट्रभाषा हिन्दी *
* राष्ट्रभाषा हिन्दी *
surenderpal vaidya
आज देव दीपावली...
आज देव दीपावली...
डॉ.सीमा अग्रवाल
गजल सगीर
गजल सगीर
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
चुनाव
चुनाव
Neeraj Agarwal
"इतिहास गवाह है"
Dr. Kishan tandon kranti
पिता का बेटी को पत्र
पिता का बेटी को पत्र
प्रीतम श्रावस्तवी
खुशियों के पल पल में रंग भर जाए,
खुशियों के पल पल में रंग भर जाए,
Kanchan Alok Malu
सोच समझ कर
सोच समझ कर
पूर्वार्थ
My love at first sight !!
My love at first sight !!
Rachana
विराम चिह्न
विराम चिह्न
Neelam Sharma
आज बाजार बन्द है
आज बाजार बन्द है
gurudeenverma198
सांसें स्याही, धड़कनें कलम की साज बन गई,
सांसें स्याही, धड़कनें कलम की साज बन गई,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
शिक़ायत नहीं है
शिक़ायत नहीं है
Monika Arora
बहुत गहरी थी रात
बहुत गहरी थी रात
ऐ./सी.राकेश देवडे़ बिरसावादी
दर्द ऐसा था जो लिखा न जा सका
दर्द ऐसा था जो लिखा न जा सका
krishna waghmare , कवि,लेखक,पेंटर
"हम मिले थे जब, वो एक हसीन शाम थी"
ठाकुर प्रतापसिंह "राणाजी"
शुभ धाम हूॅं।
शुभ धाम हूॅं।
Pt. Brajesh Kumar Nayak
ये जो लोग दावे करते हैं न
ये जो लोग दावे करते हैं न
ruby kumari
ऋषि मगस्तय और थार का रेगिस्तान (पौराणिक कहानी)
ऋषि मगस्तय और थार का रेगिस्तान (पौराणिक कहानी)
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
Loading...