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18 Nov 2022 · 1 min read

कौन लोग थे

दिल पर दस्तक देने वाले ,कौन‌ लोग थे।
लग गये जो हमको जाने ,क्या रोग थे।

किन किन बातों पर ,आंखें उसकी छलकी
मैं न जाना उसके मन में क्या सोग थे।

भूखे पेट भिखारी करे उस ईश्वर से मिन्नतें
जिस ईश्वर के आगे रखें छप्पन भोग थे।

न तन संभला ,न मन ही संभला है हम से
घर से निकले हम कमाने को जोग थे।

खुद से मुलाकात करने को ,खुद से उलझे
न खुद को मिले,न खुदा मिला क्या संयोग थे।

सुरिंदर कौर

Language: Hindi
Tag: कविता
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