Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
4 Sep 2023 · 1 min read

*कौन लड़ पाया समय से, हार सब जाते रहे (वैराग्य गीत)*

कौन लड़ पाया समय से, हार सब जाते रहे (वैराग्य गीत)
________________________
कौन लड़ पाया समय से, हार सब जाते रहे
1)
सॉंसें हमें गिन कर मिलीं, खर्च सब होती रहीं
इंद्रियॉं बूढ़ी नियंत्रण, देह से खोती रहीं
चार दिन संसार में सब, देह को गाते रहे
2)
फिर वही किस्से पुराने, दृश्य दोहराने लगे
याद घटनाऍं पुरानी, चित्र सब आने लगे
फॅंस गईं सॉंसें भॅंवर में, यह नियति पाते रहे
3)
कौन वह तन से परे है, जान पाया कौन है
एक शाश्वत तत्त्व भीतर, जो रहा चिर मौन है
खुद को सहस्त्रों वर्ष से, खोजने आते रहे
कौन लड़ पाया समय से, हार सब जाते रहे
—————————————-
रचयिता : रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा, रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 9997615 451

232 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Ravi Prakash
View all
You may also like:
You are not born
You are not born
Vandana maurya
शैक्षिक विकास
शैक्षिक विकास
Dr. Pradeep Kumar Sharma
मानव और मशीनें
मानव और मशीनें
Mukesh Kumar Sonkar
# जय.….जय श्री राम.....
# जय.….जय श्री राम.....
Chinta netam " मन "
मुक्तक
मुक्तक
जगदीश शर्मा सहज
एक दिवाली ऐसी भी।
एक दिवाली ऐसी भी।
Manisha Manjari
कुछ बीते हुए पल -बीते हुए लोग जब कुछ बीती बातें
कुछ बीते हुए पल -बीते हुए लोग जब कुछ बीती बातें
Atul "Krishn"
■ संवेदनशील मन अतीत को कभी विस्मृत नहीं करता। उसमें और व्याव
■ संवेदनशील मन अतीत को कभी विस्मृत नहीं करता। उसमें और व्याव
*Author प्रणय प्रभात*
प्रकृति भी तो शांत मुस्कुराती रहती है
प्रकृति भी तो शांत मुस्कुराती रहती है
ruby kumari
नौकरी
नौकरी
Aman Sinha
कविता कि प्रेम
कविता कि प्रेम
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
मौजु
मौजु
DR ARUN KUMAR SHASTRI
दिल से दिल को जोड़, प्रीति रंग गाती होली
दिल से दिल को जोड़, प्रीति रंग गाती होली
Pt. Brajesh Kumar Nayak
स्वाद छोड़िए, स्वास्थ्य पर ध्यान दीजिए।
स्वाद छोड़िए, स्वास्थ्य पर ध्यान दीजिए।
Sanjay ' शून्य'
शुरुवात जरूरी है...!!
शुरुवात जरूरी है...!!
Shyam Pandey
*खाओ गरम कचौड़ियॉं, आओ यदि बृजघाट (कुंडलिया)*
*खाओ गरम कचौड़ियॉं, आओ यदि बृजघाट (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
सच तो फूल होते हैं।
सच तो फूल होते हैं।
Neeraj Agarwal
जरुरी है बहुत जिंदगी में इश्क मगर,
जरुरी है बहुत जिंदगी में इश्क मगर,
शेखर सिंह
Thought
Thought
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
“अनोखी शादी” ( संस्मरण फौजी -मिथिला दर्शन )
“अनोखी शादी” ( संस्मरण फौजी -मिथिला दर्शन )
DrLakshman Jha Parimal
चौबीस घन्टे साथ में
चौबीस घन्टे साथ में
Satish Srijan
बाल दिवस पर मेरी कविता
बाल दिवस पर मेरी कविता
Tarun Singh Pawar
"पानी-पूरी"
Dr. Kishan tandon kranti
मे कोई समस्या नहीं जिसका
मे कोई समस्या नहीं जिसका
Ranjeet kumar patre
मेरा सोमवार
मेरा सोमवार
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
'स्वागत प्रिये..!'
'स्वागत प्रिये..!'
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
3220.*पूर्णिका*
3220.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
एक
एक
हिमांशु Kulshrestha
मेरे सिवा कौन इतना, चाहेगा तुमको
मेरे सिवा कौन इतना, चाहेगा तुमको
gurudeenverma198
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Mahendra Narayan
Loading...