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9 Feb 2024 · 1 min read

कैसी

कैसी उल्फतों के जाल है
ताउम्र लगता है यही हाल है।

जिधर देखो उधर हुस्न के मेले है,
फिर भी खुश है कि हम अकेले है।

मैखानो पर भीड़ से ये पता चला है?
इस शहर का रूख किस तरफ बढ़ा है।

किसी का किसी से कोई लगाव नही है,
मतलबी जहां में लगता कोई बदलाव नही है।

हो जाए मुक्कमल जहां काश! कोई ऐसी दवा बता दे,
पर ये भी सच है ऐसी दवा का अब कोई न पता दे?

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