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25 Feb 2017 · 1 min read

किस रूप में

मानव माथे पड़ी लकीर कभी मिटती नहीं
फकीर माँगे देने से अमीरी घटती नहीं।
प्रभु न जाने किस भेष मे आ जाये द्वार,
दर्शन पा जीवन धन्य कभी नजर झुकती नहीं।।.
सज्जो चतुर्वेदी*****************किस रूप में.

Language: Hindi
Tag: मुक्तक
225 Views
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