Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
11 Nov 2016 · 1 min read

काला धन

विषय – काला धन

काले मन से जो कमाया जाता है ,
काले कामों में जो लगाया जाता है ।
वह काला धन कहलाता है ।।

नोट बदलने के ऐलान से ,
मोदी जी की हो रही जय जयकार है ।
काला धन रखने वालों में ,
मचा हाहाकार है ।।
जोड़ा हुआ अब तक का जो भी ,
कुछ भी काम ना आएगा ।
काले कामों का काला पैसा ,
मिट्टी में मिल जाएगा ।।
जोड़े रखा जिसको अब तक
वो छोड़ने का दिन आया है ,
वरना टैक्स की भरमार है ,
पैनल्टी की मार है ।
छापे का डर ,
सिर पर सवार है ।।
काला धन अब काला होगा ।
हाल तेरा क्या लाला होगा ?
नोटों की भरमार है ।
अब लाला का बेड़ा पार है ।।
लाला का बुरा हाल है ।
लाला का काला धन उसका काल है ,
चिंता में लाला बेहाल है ।।
यहाँ वहाँ ना जाने कहाँ कहाँ ,
लाला अपनी व्यवस्था बनाने में लगा है ।
लाला का जोड़ा धन ही ,
उसे घटाने लगा है ।।
इस संदर्भ से सब लो सीख ।
ना काला धन जोड़ेंगे,
ना जोड़ेंगे भीख।।

– नवीन कुमार जैन

Language: Hindi
337 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Naveen Jain
View all
You may also like:
योग इक्कीस जून को,
योग इक्कीस जून को,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
2796. *पूर्णिका*
2796. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
कसरत करते जाओ
कसरत करते जाओ
Harish Chandra Pande
इंसानों के अंदर हर पल प्रतिस्पर्धा,स्वार्थ,लालच,वासना,धन,लोभ
इंसानों के अंदर हर पल प्रतिस्पर्धा,स्वार्थ,लालच,वासना,धन,लोभ
Rj Anand Prajapati
बाबा महादेव को पूरे अन्तःकरण से समर्पित ---
बाबा महादेव को पूरे अन्तःकरण से समर्पित ---
सिद्धार्थ गोरखपुरी
धर्म की खिचड़ी
धर्म की खिचड़ी
विनोद सिल्ला
मां रिश्तों में सबसे जुदा सी होती है।
मां रिश्तों में सबसे जुदा सी होती है।
Taj Mohammad
कभी आधा पौन कभी पुरनम, नित नव रूप निखरता है
कभी आधा पौन कभी पुरनम, नित नव रूप निखरता है
हरवंश हृदय
तेरी परवाह करते हुए ,
तेरी परवाह करते हुए ,
Buddha Prakash
फागुन
फागुन
Punam Pande
कौन है वो .....
कौन है वो .....
sushil sarna
ये कलियाँ हसीन,ये चेहरे सुन्दर
ये कलियाँ हसीन,ये चेहरे सुन्दर
gurudeenverma198
हर दफ़ा जब बात रिश्तों की आती है तो इतना समझ आ जाता है की ये
हर दफ़ा जब बात रिश्तों की आती है तो इतना समझ आ जाता है की ये
पूर्वार्थ
"परिवार एक सुखद यात्रा"
Ekta chitrangini
*तुम साँझ ढले चले आना*
*तुम साँझ ढले चले आना*
Shashi kala vyas
जिंदगी है खाली गागर देख लो।
जिंदगी है खाली गागर देख लो।
सत्य कुमार प्रेमी
“पल भर के दीदार का कोई अर्थ नहीं।
“पल भर के दीदार का कोई अर्थ नहीं।
*Author प्रणय प्रभात*
अब कौन सा रंग बचा साथी
अब कौन सा रंग बचा साथी
Dilip Kumar
शब्द
शब्द
लक्ष्मी सिंह
जीवन
जीवन
Neeraj Agarwal
*जाता देखा शीत तो, फागुन हुआ निहाल (कुंडलिया)*
*जाता देखा शीत तो, फागुन हुआ निहाल (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
स्वभाव
स्वभाव
Sanjay ' शून्य'
मुहब्बत कुछ इस कदर, हमसे बातें करती है…
मुहब्बत कुछ इस कदर, हमसे बातें करती है…
Anand Kumar
"रंग वही लगाओ रे"
Dr. Kishan tandon kranti
मेरा परिचय
मेरा परिचय
radha preeti
बाबू जी की याद बहुत ही आती है
बाबू जी की याद बहुत ही आती है
Dr. Rajendra Singh 'Rahi'
परिस्थितीजन्य विचार
परिस्थितीजन्य विचार
Shyam Sundar Subramanian
जीवन साथी
जीवन साथी
Aman Sinha
मुक्तक
मुक्तक
कृष्णकांत गुर्जर
निंदा और निंदक,प्रशंसा और प्रशंसक से कई गुना बेहतर है क्योंक
निंदा और निंदक,प्रशंसा और प्रशंसक से कई गुना बेहतर है क्योंक
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
Loading...