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20 May 2024 · 1 min read

कहने को बाकी क्या रह गया

जब से देखा तुम्हे मै कही खो गया
और कहने को बाकी क्या रह गया।।

तुम मिले ही नही मिलने की तरह।
नसीबा मेरा रूठता रह गया।।

और कहने को बाकी क्या रह गया

शायद ये पहले हुआ ही नही।
आज जो ये मेरे साथ हो गया ।।

और कहने को बाकी क्या रह गया।।

सांझ ढलती रही ,रात जाती रही,
तेरे इंतजार का दिया बुझ गया।

और कहने को बाकी क्या रह गया।

रातरानी खिली, आंगन महक गया।
तेरे आने से ये जहां मिल गया।

और कहने को बाकी क्या रह गया।

संध्या चतुर्वेदी
मथुरा,उप

10 Likes · 2 Comments · 31 Views
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