Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
28 May 2016 · 1 min read

कविता

मैंने कभी अभिनय नहीं किया
माँ, बहन, बेटी, दादी होने का
रिश्तों को वास्तविकता से जिया
घिसे-पुराने पिछड़े रिवाजों से
तंग नहीं आई
इनके साथ समझोता कर
उनका नवीनीकरण किया
संयुक्त परिवार में रही
अब सब ने एकल किया
संस्कारों की कल्पना
टूटते परिवार, घरों में दीवार
आज की प्रथा है बस यही
व्यथा है बस यही
एक अबोध बालक ने दूसरे से कहा-
तुम अकेले क्यों हो?
वह बोला- माँ नौकरी करती है
तो क्या! दादी पाल लो
हमने भी पाली है
संस्कार दिवालिया हो गए हैं
नहीं जानती संवरेंगे
कब और कैसे?

Language: Hindi
Tag: कविता
1 Like · 213 Views
You may also like:
विद्या राजपूत से डॉ. फ़ीरोज़ अहमद की बातचीत
डॉ. एम. फ़ीरोज़ ख़ान
'बेवजह'
Godambari Negi
यादें वो बचपन के
Khushboo Khatoon
अलबेले लम्हें, दोस्तों के संग में......
Aditya Prakash
मौसम तो बस बहाना हुआ है
Kaur Surinder
हयात की तल्ख़ियां
Shekhar Chandra Mitra
सैफई रहा केन्द्र
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
प्रयोजन
Shiva Awasthi
✍️बुलडोझर✍️
'अशांत' शेखर
मै हिम्मत नही हारी
Anamika Singh
“ एक अमर्यादित शब्द के बोलने से महानायक खलनायक बन...
DrLakshman Jha Parimal
प्रेम सुखद एहसास।
Anil Mishra Prahari
पूर्ण विराम से प्रश्नचिन्ह तक
Saraswati Bajpai
दिनेश कार्तिक
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
वो इश्क है किस काम का
Ram Krishan Rastogi
तेरे रूप अनेक हैं मैया - देवी गीत
Ashish Kumar
वर्तमान से वक्त बचा लो तुम निज के निर्माण में...
AJAY AMITABH SUMAN
काम का बोझ
जगदीश लववंशी
*अपने बारे में भ्रम( कुंडलिया )*
Ravi Prakash
नव सूर्योदय
AMRESH KUMAR VERMA
बहुत कुछ कहना है
Ankita
आजादी के दीवानों ने
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
कोमल हृदय - नारी
DR ARUN KUMAR SHASTRI
💔💔...broken
Palak Shreya
कलम की वेदना (गीत)
सूरज राम आदित्य (Suraj Ram Aditya)
Writing Challenge- समाचार (News)
Sahityapedia
तुम्हारे सिवा भी बहुत है
gurudeenverma198
मुकम्मल हुआ हूं आज।
Taj Mohammad
पेशकश पर
Dr fauzia Naseem shad
किस अदा की बात करें
Mahesh Tiwari 'Ayen'
Loading...