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10 Aug 2023 · 1 min read

कर लो चाहे जो जतन, नहीं गलेगी दाल

कर लो चाहे जो जतन, नहीं गलेगी दाल
धारा सत्तर तीन सौ, अब अतीत का काल
रचयिता: रवि प्रकाश

Language: Hindi
380 Views
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