Sep 1, 2016 · 1 min read

करवट हर रुकी बात दे रही

तेरी खुशबू छू रही हे जो ठहरी है कल की
कुछ रात की कुछ सुबह की याद दे रही

आसमान तक झांके जिसको खिड़की से आके
वो मुलाक़ात सिरहाने को तकिया दे रही

बातें छांटें बातो में बातें रुकी आके
वो रातें जिन्हें आँखें सपनो का पानी दे रहीं

बदले बदले लगे सुबह को तकिये सिरहाने
जिनकी बांहो को करवट हर रुकी बात दे रही

91 Views
You may also like:
पिता
pradeep nagarwal
श्री राम ने
Vishnu Prasad 'panchotiya'
खिले रहने का ही संदेश
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
सुमंगल कामना
Dr.sima
मेरा गुरूर है पिता
VINOD KUMAR CHAUHAN
बिछड़न [भाग ३]
Anamika Singh
क्यों ना नये अनुभवों को अब साथ करें?
Manisha Manjari
"पिता"
Dr. Alpa H.
कोमल एहसास प्यार का....
Dr. Alpa H.
Accept the mistake
Buddha Prakash
इश्क के मारे है।
Taj Mohammad
जीवन
Mahendra Narayan
💐मौज़💐
DR ARUN KUMAR SHASTRI
हंँसना तुम सीखो ।
Buddha Prakash
All I want to say is good bye...
Abhineet Mittal
विश्व विजेता कपिल देव
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
सत् हंसवाहनी वर दे,
Pt. Brajesh Kumar Nayak
हर अश्क कह रहा है।
Taj Mohammad
पिता अब बुढाने लगे है
n_upadhye
पिता तुम हमारे
Dr. Pratibha Mahi
सिया
सिद्धार्थ गोरखपुरी
मैं भारत हूँ
Dr. Sunita Singh
मुक्तक: युद्ध को विराम दो.!
Prabhudayal Raniwal
जीवन-दाता
Prabhudayal Raniwal
तन्हाई
Alok Saxena
प्रेम
श्रीहर्ष आचार्य
सारी फिज़ाएं छुप सी गई हैं
VINOD KUMAR CHAUHAN
$$पिता$$
दिनेश एल० "जैहिंद"
राम नवमी
Ram Krishan Rastogi
"साहिल"
Dr. Alpa H.
Loading...