Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
1 Sep 2016 · 1 min read

करवट हर रुकी बात दे रही

तेरी खुशबू छू रही हे जो ठहरी है कल की
कुछ रात की कुछ सुबह की याद दे रही

आसमान तक झांके जिसको खिड़की से आके
वो मुलाक़ात सिरहाने को तकिया दे रही

बातें छांटें बातो में बातें रुकी आके
वो रातें जिन्हें आँखें सपनो का पानी दे रहीं

बदले बदले लगे सुबह को तकिये सिरहाने
जिनकी बांहो को करवट हर रुकी बात दे रही

229 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Yashvardhan Goel
View all
You may also like:
अगर हो दिल में प्रीत तो,
अगर हो दिल में प्रीत तो,
Priya princess panwar
धर्मांध
धर्मांध
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
* बढ़ेंगे हर कदम *
* बढ़ेंगे हर कदम *
surenderpal vaidya
किसी को उदास पाकर
किसी को उदास पाकर
Shekhar Chandra Mitra
Echoes By The Harbour
Echoes By The Harbour
Vedha Singh
रेत सी इंसान की जिंदगी हैं
रेत सी इंसान की जिंदगी हैं
Neeraj Agarwal
वाह भाई वाह
वाह भाई वाह
Dr Mukesh 'Aseemit'
प्रेम क्या है...
प्रेम क्या है...
हिमांशु Kulshrestha
कविता : नारी
कविता : नारी
Sushila joshi
"बेशर्मी" और "बेरहमी"
*प्रणय प्रभात*
"लक्ष्य"
Dr. Kishan tandon kranti
तू सीमा बेवफा है
तू सीमा बेवफा है
gurudeenverma198
एक कुंडलियां छंद-
एक कुंडलियां छंद-
Vijay kumar Pandey
मै नर्मदा हूं
मै नर्मदा हूं
Kumud Srivastava
कोई टूटे तो उसे सजाना सीखो,कोई रूठे तो उसे मनाना सीखो,
कोई टूटे तो उसे सजाना सीखो,कोई रूठे तो उसे मनाना सीखो,
Ranjeet kumar patre
भविष्य..
भविष्य..
Dr. Mulla Adam Ali
कभी- कभी
कभी- कभी
Harish Chandra Pande
समय
समय
Dr. Pradeep Kumar Sharma
2856.*पूर्णिका*
2856.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
सिर्फ़ वादे ही निभाने में गुज़र जाती है
सिर्फ़ वादे ही निभाने में गुज़र जाती है
अंसार एटवी
ऐ जिन्दगी तूं और कितना इम्तिहान लेंगी
ऐ जिन्दगी तूं और कितना इम्तिहान लेंगी
Keshav kishor Kumar
*मरण सुनिश्चित सच है सबका, कैसा शोक मनाना (गीत)*
*मरण सुनिश्चित सच है सबका, कैसा शोक मनाना (गीत)*
Ravi Prakash
दो शे'र
दो शे'र
डॉक्टर वासिफ़ काज़ी
जिदंगी भी साथ छोड़ देती हैं,
जिदंगी भी साथ छोड़ देती हैं,
Umender kumar
फ़लसफ़े - दीपक नीलपदम्
फ़लसफ़े - दीपक नीलपदम्
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
कभी-कभी
कभी-कभी
Sûrëkhâ
No battles
No battles
Dhriti Mishra
लत
लत
Mangilal 713
ज्ञान-दीपक
ज्ञान-दीपक
Pt. Brajesh Kumar Nayak
सीने का समंदर, अब क्या बताऊ तुम्हें
सीने का समंदर, अब क्या बताऊ तुम्हें
The_dk_poetry
Loading...