Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
5 Feb 2024 · 2 min read

करगिल के वीर

करगिल के जो थे बलिदानी,
उनकी भी थी प्रेम कहानी
उनके सीनों में भी दिल था
चढ़ता यौवन, मस्त जवानी
कुछ वे जिनका ब्याह हुआ था
कुछ की केवल हुई सगाई
कुछ की घर में बात चली थी
कुछ बाँकों की आँख लड़ी थी
कुछ ऐसे थे जिनके घर में
पत्नी और छोटे बच्चे थे
प्यार सभी के दिल में सच्चा
फूलों में सुगन्ध के जैसा
प्रेम संजोए अपने दिल में
वे सीमा पर खड़े हुए थे
प्रत्युत्तर देने दुश्मन को
चट्टानें वह खड़ी चढ़े थे
रणचंडी की बलि वेदी पर
चौरासी दिन यज्ञ हुआ था
घृत आहुति से नहीं
वीर के प्राणों से
यह यज्ञ हुआ था
जीता था भारत इस रण में
विजय पताका लहरायी थी
पर यह विजय सैनिकों के
प्राणों के बदले में आयी थी
कितने हुए हताहत कितनी
ज़ख्मी होकर घर लौटे थे
कितने बन्दी और गुमशुदा
हम जिनको ना गिन सकते थे
इन सबके जो तार जुड़े थे
परिजन और परिवार जुड़े थे
पुत्र, पिता, प्रेमी, पति, भाई
विजय ज्योति पर भस्म हुए थे
उनकी पत्नी बिलख रही थीं
बहिनों की थाली की राखी
शून्य दिशा में धूर रही थीं
पत्थर सी माँओं की आँखे
आँसू के बिन सूख गयी थीं
माथे के सिन्दूर मिटे थे
कहीं चूड़ियाँ टूट रही थीं
बिलख रहे थे बच्चे छोटे
माँयें बेसुध पड़ी हुयी थीं
सावन बरस रहा था झर-झर
सूने झूले वहाँ पड़े थे
मेंहदी के रंगों से रीती
प्रिया हथेली देख रही थी
पड़ी हुई थीं राहें सूनी
जहाँ अभी तक आँख बिछी थी
और प्रतीक्षा की घड़ियों की
हृदय-गती अवरुद्ध हुई थीं
शोक मग्न आकाश हुआ था
सावन भी रोता था जैसे
बादल के आँखों के आँसू
रुधिर धरा का धोते जैसे
बीत गया वह युद्घ पुराना
यादें क्षीण हुईं मानस से
पर जिनके प्रियवर सोये थे
आँखों के तारे खोये थे
बसर दर बरस यह बरसातें
उनके घाव हरे करती है
झूला, मेंहदी, कजरी, राखी
यादों से विह्वल करती हैं
सावन आये या ना आये
इनकी आँखे नम रहती हैं
पतझड़, शीत, शरद, गर्मी में
भी वर्षा होती रहती है…
यह आँखे निशि-दिन रोती हैं

2 Likes · 67 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
प्रकृति कि  प्रक्रिया
प्रकृति कि प्रक्रिया
Rituraj shivem verma
छलावा
छलावा
Sushmita Singh
23/137.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/137.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
मैयत
मैयत
शायर देव मेहरानियां
SHELTER OF LIFE
SHELTER OF LIFE
Awadhesh Kumar Singh
There is no shortcut through the forest of life if there is
There is no shortcut through the forest of life if there is
सतीश पाण्डेय
चुनाव में मीडिया की भूमिका: राकेश देवडे़ बिरसावादी
चुनाव में मीडिया की भूमिका: राकेश देवडे़ बिरसावादी
ऐ./सी.राकेश देवडे़ बिरसावादी
माँ महागौरी है नमन
माँ महागौरी है नमन
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
🦋 आज की प्रेरणा 🦋
🦋 आज की प्रेरणा 🦋
Tarun Singh Pawar
अक्सर औरत को यह खिताब दिया जाता है
अक्सर औरत को यह खिताब दिया जाता है
Harminder Kaur
बिताया कीजिए कुछ वक्त
बिताया कीजिए कुछ वक्त
पूर्वार्थ
सुबह की नींद सबको प्यारी होती है।
सुबह की नींद सबको प्यारी होती है।
Yogendra Chaturwedi
वक्त कि ये चाल अजब है,
वक्त कि ये चाल अजब है,
SPK Sachin Lodhi
नवयुग का भारत
नवयुग का भारत
AMRESH KUMAR VERMA
जीवन की परिभाषा क्या ?
जीवन की परिभाषा क्या ?
Dr fauzia Naseem shad
जो जिस चीज़ को तरसा है,
जो जिस चीज़ को तरसा है,
Pramila sultan
*चुनावी कुंडलिया*
*चुनावी कुंडलिया*
Ravi Prakash
नियम, मर्यादा
नियम, मर्यादा
DrLakshman Jha Parimal
करता नहीं हूँ फिक्र मैं, ऐसा हुआ तो क्या होगा
करता नहीं हूँ फिक्र मैं, ऐसा हुआ तो क्या होगा
gurudeenverma198
जय श्री कृष्णा राधे राधे
जय श्री कृष्णा राधे राधे
Shashi kala vyas
*सेब का बंटवारा*
*सेब का बंटवारा*
Dushyant Kumar
हवन - दीपक नीलपदम्
हवन - दीपक नीलपदम्
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
■ मेरे विचार से...
■ मेरे विचार से...
*Author प्रणय प्रभात*
तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है
तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है
DR ARUN KUMAR SHASTRI
मुक्तक -*
मुक्तक -*
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
एक नासूर हो ही रहा दूसरा ज़ख्म फिर खा लिया।
एक नासूर हो ही रहा दूसरा ज़ख्म फिर खा लिया।
ओसमणी साहू 'ओश'
दिल होता .ना दिल रोता
दिल होता .ना दिल रोता
Vishal Prajapati
दुनिया दिखावे पर मरती है , हम सादगी पर मरते हैं
दुनिया दिखावे पर मरती है , हम सादगी पर मरते हैं
कवि दीपक बवेजा
सुविचार
सुविचार
Sanjeev Kumar mishra
सृजन और पीड़ा
सृजन और पीड़ा
Shweta Soni
Loading...