Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
28 Apr 2022 · 2 min read

कन्यादान क्यों और किसलिए [भाग६]

इस रस्म के कारण मेरे पापा
सारे रिशते बदल जाएँगे।
फिर न इन रिश्तों पर अधिकार,
किसी का किसी पर रह जाएगा।

फिर मैं क्या पापा आपको ,
पहले सा गला लगा पाऊँगी।
क्या पहले जैसा ही गोद में
मैं सर रखकर सो पाऊँगी।

जब कभी मैं थक कर पापा
इस घर में कभी आऊँगी ।
क्या माँ के आँचल पर पहले
जैसा मैं हक जता पाऊँगी।

माँ के आँचल पर क्या पापा ,
पहले सा हक हो पाएगा ।
क्या पहले जैसा फिर पापा
माँ के आँचल में छुप पाऊँगी।

आपने उस माँ के लिए
कभी सोचा हैं पापा।
जो अपनी माँ को घर छोड़कर थी
यहाँ पर आई,
और उसकी बेटी भी पापा,
उसके पास न रह पाई ।

जब दान आपने मेरा किया था।
उनका अंग भी कटा था पापा।
क्या उनके जख्मों का एहसास
कभी आपने किया है पापा।

आपने कभी सोचा हैं पापा,
उस माँ पर क्या गुजरती हैं।
जिसके माँ के दिल के टुकड़े पर ,
इस रस्म ने हैं प्रहार किया।

उस माँ के जख्म का दर्द,
कभी क्या कोई भर सकता हैं ।
जिसकी आँखे इस रस्म के बाद ,
कभी सूखी नहीं पड़ती है।

मैं तो यह भी मानती हूँ पापा,
आपने भी इस रस्म को,
दिल से नहीं निभाया होगा।
इस रस्म निभाने के बाद पापा,
आपने भी कहाँ चैन से सोया होगा ।
मेरी यादों ने आपको पापा
हर रोज आकर बहुत रूलाया होगा ।

आपने अपने ऊपर भी,
कई बार गुस्सा जताया होगा।
कई दिनों तक आपने भी पापा,
ठीक से नहीं खाया होगा।

~अनामिका

Language: Hindi
5 Likes · 399 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
जहर मे भी इतना जहर नही होता है,
जहर मे भी इतना जहर नही होता है,
Ranjeet kumar patre
मुझे क्रिकेट के खेल में कोई दिलचस्पी नही है
मुझे क्रिकेट के खेल में कोई दिलचस्पी नही है
ruby kumari
नृत्य किसी भी गीत और संस्कृति के बोल पर आधारित भावना से ओतप्
नृत्य किसी भी गीत और संस्कृति के बोल पर आधारित भावना से ओतप्
Rj Anand Prajapati
कर्म ही है श्रेष्ठ
कर्म ही है श्रेष्ठ
Sandeep Pande
सत्य की खोज........एक संन्यासी
सत्य की खोज........एक संन्यासी
Neeraj Agarwal
ہر طرف رنج ہے، آلام ہے، تنہائی ہے
ہر طرف رنج ہے، آلام ہے، تنہائی ہے
अरशद रसूल बदायूंनी
बात जो दिल में है
बात जो दिल में है
Shivkumar Bilagrami
रात क्या है?
रात क्या है?
Astuti Kumari
पेशावर की मस्जिद में
पेशावर की मस्जिद में
Satish Srijan
*मौत आग का दरिया*
*मौत आग का दरिया*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
तुम्हारा साथ
तुम्हारा साथ
Ram Krishan Rastogi
चल पनघट की ओर सखी।
चल पनघट की ओर सखी।
Anil Mishra Prahari
"दण्डकारण्य"
Dr. Kishan tandon kranti
■ एक महीन सच्चाई।।
■ एक महीन सच्चाई।।
*Author प्रणय प्रभात*
"ये दृश्य बदल जाएगा.."
MSW Sunil SainiCENA
घरौंदा
घरौंदा
Madhavi Srivastava
कितनी सलाखें,
कितनी सलाखें,
Surinder blackpen
अपना...❤❤❤
अपना...❤❤❤
Vishal babu (vishu)
महाराष्ट्र की राजनीति
महाराष्ट्र की राजनीति
Anand Kumar
2785. *पूर्णिका*
2785. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
मौत की आड़ में
मौत की आड़ में
Dr fauzia Naseem shad
बसंत
बसंत
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
अहिल्या
अहिल्या
अनूप अम्बर
आशा
आशा
नवीन जोशी 'नवल'
*आओ खेलें खेल को, खेल-भावना संग (कुंडलिया)*
*आओ खेलें खेल को, खेल-भावना संग (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
बेटी के जीवन की विडंबना
बेटी के जीवन की विडंबना
Rajni kapoor
युगों    पुरानी    कथा   है, सम्मुख  करें व्यान।
युगों पुरानी कथा है, सम्मुख करें व्यान।
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
यह ज़मीं है सबका बसेरा
यह ज़मीं है सबका बसेरा
gurudeenverma198
जीवन चक्र
जीवन चक्र
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
- अपनो का स्वार्थीपन -
- अपनो का स्वार्थीपन -
bharat gehlot
Loading...