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3 Mar 2023 · 1 min read

💐प्रेम कौतुक-330💐

एक सफ़र भी तय न कर सके वो,
अपनी इक सिफ़त भी न बताई गई,
हिज़्र को कैसे कब सम्भालते हैं वो,
तो हमसे अपनी नज़र न हटाई गई।

©®अभिषेक: पाराशरः “आनन्द”

Language: Hindi
285 Views
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