Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
4 Feb 2024 · 1 min read

*एक चूहा*

एक चूहा
दिनभर बिल के अंदर
छिपकर – रहकर
निकला बाहर
रात में
घरवालों के सोने के बाद ।

उसे नजर आया
रोटी का टुकड़ा
सोचने लगा:
मालिक ने दी रोटी
तो लोहे के पिंजरे के अंदर
क्या करें/ क्या न करें
दिनभर का भूखा तो था ही
पेट में चूहे भी कूद रहे ही थे ।

खोज निकाला
रोटी पाने का रास्ता
फिर टूट पड़ा
दांत के मोह बिना,
छेड़ा लटकते हुए रोटी को
तार हिली और पिंजरे का शटर गिरा
भूख तो मिटी नहीं
बंधकर/ बंद होकर रह गया
लोहे के सीखचों के अंदर
अपराधी की तरह ।

सोचता रहा रातभर
सोते जागते
रोटी के बारे में,
होते ही सबेरा
मालिक ने देखा अपना शिकार
बिना पूछे रोटी खाने के जुर्म में/
एक अपराधी ।

मालिक ने कर दिया आजाद
बुलाकर एक कुत्ता ।
लेकिन जरा नहीं विचलित हुआ वह
काम आया साहस और हौंसला
चलाकी से भाग निकला अलबत्ता
अवाक रह गया कुत्ता ।

दूर जाकर छिपकर
देखता रहा कुत्ता और
सोंचता रहा
भूख के बारे में
हल के बारे में ।
**************************”*************** मौलिक रचना घनश्याम पोद्दार
मुंगेर

Language: Hindi
88 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
Dr arun kumar शास्त्री
Dr arun kumar शास्त्री
DR ARUN KUMAR SHASTRI
मेरे दिल की गहराई में,
मेरे दिल की गहराई में,
Dr. Man Mohan Krishna
शीर्षक - सच (हमारी सोच)
शीर्षक - सच (हमारी सोच)
Neeraj Agarwal
When you think it's worst
When you think it's worst
Ankita Patel
साया ही सच्चा
साया ही सच्चा
Atul "Krishn"
बुराई कर मगर सुन हार होती है अदावत की
बुराई कर मगर सुन हार होती है अदावत की
आर.एस. 'प्रीतम'
*पापा (बाल कविता)*
*पापा (बाल कविता)*
Ravi Prakash
THE GREY GODDESS!
THE GREY GODDESS!
Dhriti Mishra
मिथकीय/काल्पनिक/गप कथाओं में अक्सर तर्क की रक्षा नहीं हो पात
मिथकीय/काल्पनिक/गप कथाओं में अक्सर तर्क की रक्षा नहीं हो पात
Dr MusafiR BaithA
शोख लड़की
शोख लड़की
Ghanshyam Poddar
हजारों के बीच भी हम तन्हा हो जाते हैं,
हजारों के बीच भी हम तन्हा हो जाते हैं,
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
जिसे मैं ने चाहा हद से ज्यादा,
जिसे मैं ने चाहा हद से ज्यादा,
Sandeep Mishra
कभी जब आपका दीदार होगा
कभी जब आपका दीदार होगा
सत्य कुमार प्रेमी
तुम गंगा की अल्हड़ धारा
तुम गंगा की अल्हड़ धारा
Sahil Ahmad
सम्यक योग की साधना दुरुस्त करे सब भोग,
सम्यक योग की साधना दुरुस्त करे सब भोग,
Mahender Singh
वक़्त ने जिनकी
वक़्त ने जिनकी
Dr fauzia Naseem shad
!! सुविचार !!
!! सुविचार !!
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
जलियांवाला बाग,
जलियांवाला बाग,
अनूप अम्बर
क्यों ? मघुर जीवन बर्बाद कर
क्यों ? मघुर जीवन बर्बाद कर
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
उमंग जगाना होगा
उमंग जगाना होगा
Pratibha Pandey
A daughter's reply
A daughter's reply
Bidyadhar Mantry
मकर संक्रांति
मकर संक्रांति
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
मुक्तक
मुक्तक
प्रीतम श्रावस्तवी
Tujhe pane ki jung me khud ko fana kr diya,
Tujhe pane ki jung me khud ko fana kr diya,
Sakshi Tripathi
"सत्ता से संगठम में जाना"
*Author प्रणय प्रभात*
ग़ज़ल/नज़्म - मैं बस काश! काश! करते-करते रह गया
ग़ज़ल/नज़्म - मैं बस काश! काश! करते-करते रह गया
अनिल कुमार
हमें यह ज्ञात है, आभास है
हमें यह ज्ञात है, आभास है
DrLakshman Jha Parimal
" खामोशी "
Aarti sirsat
तेरी याद
तेरी याद
SURYA PRAKASH SHARMA
Loading...