Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
9 Apr 2024 · 1 min read

उस दिन

उस दिन
हम
जीवन जीने की कला
सीख जाएंगें,
जिस दिन
हम
फूट-फूटकर हँसना
और खिलखिलाकर
रोना
सीख जाएंगें
🥀🥀🥀 श्वेता🥀🥀🥀

36 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Shweta Soni
View all
You may also like:
घाटे का सौदा
घाटे का सौदा
विनोद सिल्ला
Uljhane bahut h , jamane se thak jane ki,
Uljhane bahut h , jamane se thak jane ki,
Sakshi Tripathi
"ढोंग-पसंद रियासत
*Author प्रणय प्रभात*
*मतदान*
*मतदान*
Shashi kala vyas
सच्ची होली
सच्ची होली
Mukesh Kumar Rishi Verma
है कौन वहां शिखर पर
है कौन वहां शिखर पर
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
पुनीत /लीला (गोपी) / गुपाल छंद (सउदाहरण)
पुनीत /लीला (गोपी) / गुपाल छंद (सउदाहरण)
Subhash Singhai
"मेरी आवाज"
Dr. Kishan tandon kranti
Lamhon ki ek kitab hain jindagi ,sanso aur khayalo ka hisab
Lamhon ki ek kitab hain jindagi ,sanso aur khayalo ka hisab
Sampada
झुकाव कर के देखो ।
झुकाव कर के देखो ।
Buddha Prakash
दिल की भाषा
दिल की भाषा
Ram Krishan Rastogi
घर की रानी
घर की रानी
Kanchan Khanna
3393⚘ *पूर्णिका* ⚘
3393⚘ *पूर्णिका* ⚘
Dr.Khedu Bharti
अधूरा प्रयास
अधूरा प्रयास
Sûrëkhâ
साथ मेरे था
साथ मेरे था
Dr fauzia Naseem shad
Learn the things with dedication, so that you can adjust wel
Learn the things with dedication, so that you can adjust wel
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
सफर दर-ए-यार का,दुश्वार था बहुत।
सफर दर-ए-यार का,दुश्वार था बहुत।
पूर्वार्थ
प्राणवल्लभा 2
प्राणवल्लभा 2
अभिषेक पाण्डेय 'अभि ’
आप
आप
Bodhisatva kastooriya
"क्रोधित चिड़िमार"(संस्मरण -फौजी दर्शन ) {AMC CENTRE LUCKNOW}
DrLakshman Jha Parimal
झूठी हमदर्दियां
झूठी हमदर्दियां
Surinder blackpen
विनती
विनती
Dr. Upasana Pandey
धुंध इतनी की खुद के
धुंध इतनी की खुद के
Atul "Krishn"
World Book Day
World Book Day
Tushar Jagawat
"स्वार्थी रिश्ते"
Ekta chitrangini
*पानी केरा बुदबुदा*
*पानी केरा बुदबुदा*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
ज़िम्मेदार कौन है??
ज़िम्मेदार कौन है??
Sonam Puneet Dubey
आ जाते हैं जब कभी, उमड़ घुमड़ घन श्याम।
आ जाते हैं जब कभी, उमड़ घुमड़ घन श्याम।
surenderpal vaidya
बिछोह
बिछोह
Shaily
*बरसे एक न बूँद, मेघ क्यों आए काले ?*(कुंडलिया)
*बरसे एक न बूँद, मेघ क्यों आए काले ?*(कुंडलिया)
Ravi Prakash
Loading...