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13 Apr 2023 · 1 min read

इस मुकाम पे तुझे क्यूं सूझी बिछड़ने की

इस मुकाम पे तुझे क्यूं सूझी बिछड़ने की
हम अभी तो पहुंचे हैं बुलन्दी -ए-इश्क की

शिव प्रताप लोधी

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