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22 Sep 2016 · 1 min read

इस दिल को आराम नहीं हैं

यूँ तो हम गुलफाम नहीं हैं
लेकिन हम गुमनाम नहीं हैं

आदत है कवितायेँ लिखना
यूँ न समझना काम नहीं हैं

खेत और खलिहानों जैसा
कोई तीरथ धाम नहीं हैं

वो भी सबके जैसे निकले
ख़ास हुए अब, आम नहीं हैं

तितली भँवरे आयें कैसे
कलियों के पैगाम नहीं हैं

आदर्शों की बात न करना
कलयुग है अब, राम नहीं हैं

सोच-विचारों में है डूबा
इस दिल को आराम नहीं हैं

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