Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
22 Jul 2023 · 1 min read

इंसान VS महान

इंसान VS महान

इंसान बनना हमारे वश में होता है, हमें इंसान बनने, बने रहने के लिए निरंतर प्रयत्न रत होना होता है, जबकि महान बनना कतई हमारे वश में नहीं होता।

महान बनाना लोगों का काम है, ख़ुद का नहीं। अलबत्ता, हमारे कर्मों में लोग महानता ढूंढ़ लेते हैं तो हम महान कहलाते हैं।

इंसान होना हमेशा एक आब्जेक्टिव धारणा होना चाहिए, जबकि महान होना सर्वथा सब्जेक्टिव!

163 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr MusafiR BaithA
View all
You may also like:
*धरती की आभा बढ़ी,, बूँदों से अभिषेक* (कुंडलिया)
*धरती की आभा बढ़ी,, बूँदों से अभिषेक* (कुंडलिया)
Ravi Prakash
गांव
गांव
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
23/46.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/46.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
जलाने दो चराग हमे अंधेरे से अब डर लगता है
जलाने दो चराग हमे अंधेरे से अब डर लगता है
Vishal babu (vishu)
*वक्त की दहलीज*
*वक्त की दहलीज*
Harminder Kaur
6-जो सच का पैरोकार नहीं
6-जो सच का पैरोकार नहीं
Ajay Kumar Vimal
रक्तदान
रक्तदान
Neeraj Agarwal
*Khus khvab hai ye jindagi khus gam ki dava hai ye jindagi h
*Khus khvab hai ye jindagi khus gam ki dava hai ye jindagi h
Vicky Purohit
खुद में भी एटीट्यूड होना जरूरी है साथियों
खुद में भी एटीट्यूड होना जरूरी है साथियों
शेखर सिंह
जरूरी बहुत
जरूरी बहुत
surenderpal vaidya
सारे जग को मानवता का पाठ पढ़ा कर चले गए...
सारे जग को मानवता का पाठ पढ़ा कर चले गए...
Sunil Suman
दो शब्द ढूँढ रहा था शायरी के लिए,
दो शब्द ढूँढ रहा था शायरी के लिए,
Shashi Dhar Kumar
बेवफा
बेवफा
नेताम आर सी
*वरद हस्त सिर पर धरो*..सरस्वती वंदना
*वरद हस्त सिर पर धरो*..सरस्वती वंदना
Poonam Matia
बगुले ही बगुले बैठे हैं, भैया हंसों के वेश में
बगुले ही बगुले बैठे हैं, भैया हंसों के वेश में
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
गाँधी हमेशा जिंदा है
गाँधी हमेशा जिंदा है
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
■ कितना वदल गया परिवेश।।😢😢
■ कितना वदल गया परिवेश।।😢😢
*Author प्रणय प्रभात*
"बँटवारा"
Dr. Kishan tandon kranti
अपने ज्ञान को दबा कर पैसा कमाना नौकरी कहलाता है!
अपने ज्ञान को दबा कर पैसा कमाना नौकरी कहलाता है!
Suraj kushwaha
हाथों की लकीरों तक
हाथों की लकीरों तक
Dr fauzia Naseem shad
कभी सुलगता है, कभी उलझता  है
कभी सुलगता है, कभी उलझता है
Anil Mishra Prahari
साइबर ठगी हाय रे, करते रहते लोग
साइबर ठगी हाय रे, करते रहते लोग
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
सारा रा रा
सारा रा रा
Sanjay ' शून्य'
मां
मां
Dr. Pradeep Kumar Sharma
"मुश्किल वक़्त और दोस्त"
Lohit Tamta
"शिक्षक तो बोलेगा”
पंकज कुमार कर्ण
प्रकृति का प्रकोप
प्रकृति का प्रकोप
Kanchan verma
हवा चली है ज़ोर-ज़ोर से
हवा चली है ज़ोर-ज़ोर से
Vedha Singh
जा रहा है
जा रहा है
Mahendra Narayan
पढ़े साहित्य, रचें साहित्य
पढ़े साहित्य, रचें साहित्य
संजय कुमार संजू
Loading...