Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Settings
Jul 18, 2016 · 1 min read

आसमान में बदरा छाये

आसमान में बदरा छाये
देख कृषक मन भी हरषाये

धरती माँ की प्यास बुझाने
फसलों के तन को सहलाने
बूंदों का संगीत सुनाने
रिमझिम रिमझिम जल बरसाये
आसमान में बदरा छाये

किस्मत अपनी भी बदलेगी
धरती अब सोना उगलेगी
मीठे मीठे प्यारे प्यारे
आँखों में आ स्वप्न सजाये
आसमान में बदरा छाये

क़र्ज़ किसानों पर है इतना
गिरवी तक घर उनका अपना
हरा भरा करके खेतों को
खुशियाँ ही खुशियाँ घर लाये
आसमान में बदरा छाये
डॉ अर्चना गुप्ता

138 Views
You may also like:
भोजपुरी के संवैधानिक दर्जा बदे सरकार से अपील
आकाश महेशपुरी
ठोकरों ने गिराया ऐसा, कि चलना सीखा दिया।
Manisha Manjari
सफलता कदम चूमेगी
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
तप रहे हैं दिन घनेरे / (तपन का नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
गर्मी का कहर
Ram Krishan Rastogi
घनाक्षरी छन्द
शेख़ जाफ़र खान
पिता का सपना
श्री रमण 'श्रीपद्'
याद पर लिखे अशआर
Dr fauzia Naseem shad
सब अपने नसीबों का
Dr fauzia Naseem shad
बरसात की झड़ी ।
Buddha Prakash
आतुरता
अंजनीत निज्जर
मर्यादा का चीर / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
चलो एक पत्थर हम भी उछालें..!
मनोज कर्ण
रूखा रे ! यह झाड़ / (गर्मी का नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
ख़्वाब आंखों के
Dr fauzia Naseem shad
अधुरा सपना
Anamika Singh
बहुमत
मनोज कर्ण
यादें
kausikigupta315
जीवन के उस पार मिलेंगे
Shivkumar Bilagrami
इंसानियत का एहसास भी
Dr fauzia Naseem shad
फूल और कली के बीच का संवाद (हास्य व्यंग्य)
Anamika Singh
काश मेरा बचपन फिर आता
साहित्य लेखन- एहसास और जज़्बात
अनामिका के विचार
Anamika Singh
नदी सा प्यार
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
गुलामी के पदचिन्ह
मनोज कर्ण
पिता
Santoshi devi
बिछड़ कर किसने
Dr fauzia Naseem shad
धन्य है पिता
Anil Kumar
मां की ममता
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
जुद़ा किनारे हो गये
शेख़ जाफ़र खान
Loading...